बिहार विशेष: मिथिला मखाना का वैश्विक डंका, NH-22 फोर-लेनिंग व डिजिटल जमाबंदी अभियान
बिहार का जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना 20 से अधिक देशों में पहुंचा। इसके साथ ही NH-22 कॉरिडोर और भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से राज्य के विकास को नई गति मिल रही है।
⭐ मुख्य बिंदु
- भारत से 20 से अधिक देशों को 7,200 टन से अधिक मिथिला मखाना और उसके उत्पाद निर्यात किए गए।
- बिहार सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 5-वर्षीय ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ की योजना बनाई है।
- राज्य सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक मखाना निर्यात बढ़ाकर 30,000 मीट्रिक टन करने का है।
- देश के कुल मखाना उत्पादन का 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार में उत्पादित होता है।
- NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा 82.57 किमी खंड को ₹3,590.73 करोड़ से 4-लेन किया जा रहा है।
- यह राजमार्ग नेपाल सीमा पर स्थित भिठ्ठामोड़ लैंड पोर्ट से संपर्क स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाएगा।
- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा भूमि सर्वेक्षण में डिजिटल जमाबंदी सुधार और वंशावली नामांतरण को सरल किया गया।
1. जीआई-टैग प्राप्त 'मिथिला मखाना' का वैश्विक विस्तार: 'मखाना से समृद्धि अभियान'
क्या हुआ: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और बिहार कृषि विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार, भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त ‘मिथिला मखाना’ ने वैश्विक बाजार में मजबूत पकड़ बनाई है। वित्त वर्ष के दौरान भारत से 20 से अधिक देशों को 7,200 टन से अधिक मखाना और इसके प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात किया गया, जिससे 2.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। बिहार सरकार ने राज्य में मखाना उत्पादन और निर्यात को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए 5-वर्षीय ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ (2026-27 से 2030-31) की रूपरेखा जारी की है।
पृष्ठभूमि: देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 80 से 85 प्रतिशत है। राज्य के मिथिला क्षेत्र (दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल आदि) में मखाना की पारंपरिक एवं वैज्ञानिक खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को जीआई टैग प्रदान किया गया था। बिहार सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक मखाना का वार्षिक निर्यात 30 हजार टन तक पहुंचाना है, जिसमें कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) अहम तकनीकी व विपणन सहयोग दे रहा है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
- राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (NRCM): यह केंद्र बिहार के दरभंगा जिले में स्थित है और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन कार्य करता है।
- सुपरफूड पहचान: उच्च प्रोटीन, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण इसे वैश्विक स्तर पर 'सुपरफूड' के रूप में प्रमोट किया जा रहा है।
- कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति: बिहार सरकार मखाना आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए पूंजीगत अनुदान और ऋण सहायता प्रदान कर रही है।
2. NH-22 मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा फोर-लेन परियोजना: भारत-नेपाल सीमा कनेक्टिविटी
क्या हुआ: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार, बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 (NH-22) के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को फोर-लेन में अपग्रेड करने का कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। 82.57 किलोमीटर लंबे इस सामरिक और आर्थिक कॉरिडोर को लगभग ₹3,590.73 करोड़ की पूंजीगत लागत से हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत विकसित किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि: NH-22 उत्तर बिहार के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। यह मुजफ्फरपुर में स्वर्णिम चतुर्भुज/ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा रहे NH-27 से जुड़ता है और उत्तर दिशा में सोनबरसा (भारत-नेपाल सीमा) तक जाता है। सोनबरसा के निकट स्थित भिठ्ठामोड़ लैंड कस्टम स्टेशन/लैंड पोर्ट के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार होता है। इस मार्ग के फोर-लेन बन जाने से रुन्नी सैदपुर, डुमरा, सीतामढ़ी और सोनबरसा के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात सुगम होगा और माल ढुलाई के समय में भारी कमी आएगी।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
- मॉडल: परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) पर क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसमें 40% पूंजी सरकार द्वारा निर्माण अवधि के दौरान दी जाती है और 60% रियायतग्राही लगाता है।
- रणनीतिक महत्व: भारत-नेपाल द्विपक्षीय व्यापार के अलावा यह मार्ग मां जानकी जन्मस्थली पुनौरा धाम (सीतामढ़ी) के पर्यटन विकास और रामायण सर्किट कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण कड़ी है।
3. बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण: डिजिटल जमाबंदी सुधार और उत्तराधिकार नामांतरण अभियान
क्या हुआ: बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्यभर में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण (Special Land Survey) के दौरान रैयतों की समस्याओं को दूर करने के लिए 'जमाबंदी सुधार एवं उत्तराधिकार नामांतरण अभियान' को गति दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि ऑनलाइन जमाबंदी में लिपिकीय त्रुटियां हैं, तो रैयत ऑफलाइन शिविरों में मूल साक्ष्य प्रस्तुत कर सुधार करा सकते हैं।
पृष्ठभूमि: बिहार में भूमि विवाद सिविल और आपराधिक मुकदमों का एक प्रमुख कारण रहे हैं। राज्य सरकार पूरे बिहार में आधुनिक तकनीक (हवाई फोटोग्राफी, ईटीएस और जीपीएस) के माध्यम से डिजिटल खतियान और भू-नक्शे तैयार कर रही है। इसमें जमाबंदी का डिजिटलीकरण और आधार से लिंकेज अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, पुश्तैनी संपत्तियों के लिए पारिवारिक वंशावली के आधार पर बिना किसी जटिल प्रक्रिया के उत्तराधिकार दाखिल-खारिज (Succession Mutation) की विशेष सुविधा प्रदान की गई है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु:
- परिमार्जन प्लस पोर्टल: डिजिटल जमाबंदी में नाम, रकबा या चौहद्दी की त्रुटियों को ठीक करने के लिए बिहार सरकार का आधिकारिक पोर्टल।
- भू-अभिलेखों का आधुनिकीकरण: यह कदम डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के लक्ष्यों को पूरा करता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| मिथिला मखाना GI टैग वर्ष | 2022 |
|---|---|
| राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र | दरभंगा (बिहार) |
| NH-22 फोर-लेन प्रोजेक्ट लंबाई | 82.57 किलोमीटर |
| NH-22 फोर-लेन परियोजना लागत | ₹3,590.73 करोड़ |
| देश के मखाना उत्पादन में बिहार का हिस्सा | 80% से 85% |
| मखाना निर्यात लक्ष्य (2030-31) | 30,000 टन |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (NRCM) बिहार के किस जिले में स्थित है?
Q2 मिथिला मखाना को किस वर्ष भौगोलिक संकेतक (GI Tag) का दर्जा प्रदान किया गया था?
Q3 राष्ट्रीय राजमार्ग-22 (NH-22) का फोर-लेन अपग्रेडेशन खंड बिहार के मुजफ्फरपुर को किस सीमावर्ती क्षेत्र से जोड़ता है?
Q4 बिहार सरकार द्वारा मखाना क्षेत्र के समग्र विकास हेतु किस अवधि के लिए ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ की योजना तैयार की गई है?
Q5 डिजिटल जमाबंदी और भूमि अभिलेखों में त्रुटि सुधार के लिए बिहार राजस्व विभाग द्वारा कौन सा पोर्टल संचालित किया जाता है?







