आयुष्मान वय वंदना के दो वर्ष, हरित हाइड्रोजन में भारत का नेतृत्व और अधिकरणों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
वरिष्ठ नागरिकों की आयुष्मान वय वंदना योजना के दो वर्ष पूरे हुए, भारत हरित हाइड्रोजन ऑफटेक में वैश्विक अगुआ बना तथा सुप्रीम कोर्ट ने NCLT व NCLAT में संविदा भर्तियों पर चिंता जताई।
⭐ मुख्य बिंदु
- आयुष्मान वय वंदना योजना ने 29 अक्टूबर 2026 को अपने क्रियान्वयन के दो सफल वर्ष पूरे किए।
- 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के 6 करोड़ बुजुर्गों को ₹5 लाख तक का सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है।
- दो वर्षों में योजना के तहत ₹5,668.80 करोड़ के 23.46 लाख से अधिक कैशलेस अस्पताल उपचार प्रदान किए गए।
- भारतीय कंपनियों ने 5.5 लाख MTPA से अधिक के ग्रीन हाइड्रोजन ऑफटेक अनुबंधों के साथ वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
- वर्ष 2026 में 4 लाख MTPA क्षमता के 18 नए ऑफटेक समझौते हुए, जिनसे लगभग ₹90,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने NCLT और NCLAT में संविदात्मक आधार पर कर्मचारियों की भर्ती प्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई।
- न्यायालय ने अधिकरणों में स्टाफ की स्थायी भर्ती UPSC और SSC के माध्यम से कराने तथा अधिकरण प्रमुखों को स्वायत्तता देने पर जोर दिया।
भारत के राष्ट्रीय परिदृश्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और न्यायिक-प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। केंद्र सरकार द्वारा 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए शुरू की गई ‘आयुष्मान वय वंदना योजना’ ने अपने सफल क्रियान्वयन के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। वहीं, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत भारतीय कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े ऑफटेक अनुबंध हासिल कर देश को शीर्ष पर स्थापित किया है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरणों में संविदात्मक नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए संस्थागत स्वायत्तता बनाए रखने पर बल दिया है।
1. आयुष्मान वय वंदना योजना के 2 वर्ष पूर्ण: वरिष्ठ नागरिकों को मिला सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा कवच
क्या हुआ?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में संचालित आयुष्मान वय वंदना योजना ने 29 अक्टूबर 2026 को अपने दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरे किए। 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई इस योजना ने देश भर में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को सामाजिक-आर्थिक स्थिति के भेदभाव के बिना कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का अधिकार दिया है। जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में योजना के तहत लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों (लगभग 4.5 करोड़ परिवार) को स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा मिला है और 23.46 लाख अस्पताल दाखिलों के जरिए ₹5,668.80 करोड़ से अधिक का मुफ्त उपचार प्रदान किया गया है। इसमें मोतियाबिंद से लेकर हृदय शल्य चिकित्सा (कार्डियक केयर) जैसे जटिल उपचार शामिल हैं, जिनमें हृदय संबंधी प्रक्रियाओं के लिए ही ₹649 करोड़ से अधिक स्वीकृत किए गए।
पृष्ठभूमि
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) को 2018 में सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC 2011) के आधार पर निचले 40% कमजोर परिवारों के लिए शुरू किया गया था। हालांकि, भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी और बीमारियों के भारी वित्तीय बोझ को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2024 में 70 वर्ष से ऊपर के प्रत्येक नागरिक के लिए आय सीमा की शर्त हटाते हुए ‘आयुष्मान वय वंदना’ उप-योजना प्रारंभ की।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- कवरेज सीमा: प्रति पात्र परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का द्वितीयक और तृतीयक अस्पताल उपचार कवर।
- अतिरिक्त टॉप-अप: यदि कोई परिवार पहले से ही AB PM-JAY के तहत नामांकित है, तो परिवार के 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को अलग से ₹5 लाख का विशेष टॉप-अप कवर मिलता है, जिसे परिवार के अन्य गैर-बुजुर्ग सदस्य साझा नहीं कर सकते।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय।
- विशेषता: यह योजना पूर्णतः पेपरलेस, कैशलेस और पोर्टेबल है, जिससे लाभार्थी देश के किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में उपचार करा सकते हैं।
2. भारत हरित हाइड्रोजन ऑफटेक में विश्व का अगुआ: 5.5 लाख MTPA से अधिक के अनुबंध
क्या हुआ?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने कुल 5.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) से अधिक की संचयी हरित हाइड्रोजन ऑफटेक प्रतिबद्धताओं (Offtake Commitments) पर हस्ताक्षर कर भारत को विश्व में शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया है। अकेले वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों ने 4 लाख MTPA से अधिक आपूर्ति के लिए 18 नए ऑफटेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के शुभारंभ के बाद से अब तक कुल 23 अनुबंध निष्पादित किए जा चुके हैं, जिनमें से 70% से अधिक मात्रा विदेशी बाजारों में निर्यात के लिए लक्षित है। इन सभी परियोजनाओं से देश में लगभग ₹90,000 करोड़ (करीब 9.5 अरब अमेरिकी डॉलर) का प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित होने का अनुमान है।
पृष्ठभूमि
भारत सरकार ने 4 जनवरी 2023 को ₹19,744 करोड़ के परिव्यय के साथ ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (NGHM) को मंजूरी दी थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्नों (जैसे ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल) के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, जिससे वर्ष 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ (शुद्ध शून्य उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- NGHM 2030 के लक्ष्य: देश में प्रति वर्ष कम से कम 5 MMTPA हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना और इसके लिए लगभग 125 GW की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना।
- आर्थिक व पर्यावरणीय लाभ: ₹8 लाख करोड़ से अधिक का कुल निवेश, 6 लाख से अधिक स्वच्छ रोजगार का सृजन, और लगभग 50 MMT वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।
- प्रोत्साहन तंत्र: मिशन के तहत ‘रणनीतिक हस्तक्षेप के लिए हरित हाइड्रोजन संक्रमण’ (SIGHT) कार्यक्रम के जरिए इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन हेतु वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
3. NCLT और NCLAT में नियुक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: स्वायत्तता और नियमित भर्ती पर बल
क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) की कार्यप्रणाली तथा वहां कर्मचारियों की नियुक्ति व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। न्यायालय ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के अत्यधिक प्रशासनिक दखल और महत्वपूर्ण न्यायिक व रजिस्ट्री पदों पर संविदात्मक (contractual) आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रथा की आलोचना की। पीठ ने निर्देश दिया कि अधिकरणों के अध्यक्षों (Chairpersons) को प्रशासनिक और कार्मिक मामलों में पूर्ण स्वतंत्रता मिलनी चाहिए तथा अधिकरणों में स्थायी कर्मचारियों की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) जैसी पारदर्शी संस्थाओं के माध्यम से की जानी चाहिए।
पृष्ठभूमि
कंपनी अधिनियम 2013 और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के तहत वाणिज्यिक विवादों व कॉर्पोरेट दिवालियापन के त्वरित निपटारे के लिए NCLT (अधिकरण) और NCLAT (अपीलीय मंच) स्थापित किए गए थे। वर्षों से इन अधिकरणों में न्यायिक सदस्यों, तकनीकी सदस्यों और सहायक कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मामलों का लंबा बैकलॉग बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, संविदा कर्मियों के कारण संवेदनशील कॉर्पोरेट रिकॉर्ड की सुरक्षा और संस्थागत गोपनीयता पर भी सवाल उठते रहे हैं।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के भाग XIV-A (42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा शामिल) के तहत अनुच्छेद 323A (प्रशासनिक अधिकरण) और अनुच्छेद 323B (अन्य मामलों के लिए अधिकरण) का प्रावधान है।
- न्यायिक सिद्धांत: एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997) और मद्रास बार एसोसिएशन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अधिकरणों की स्वतंत्रता कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त रहनी चाहिए और उनका न्यायिक स्वरूप उच्च न्यायालयों के समान निष्पक्ष होना चाहिए।
- अंतरिम उपाय: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि नियमित भर्ती पूरी होने तक संवेदनशील पदों पर सरकारी विभागों से प्रतिनियुक्ति (deputation) पर कार्मिकों को तैनात किया जाए ताकि जवाबदेही और रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| आयुष्मान वय वंदना शुभारंभ तिथि | 29 अक्टूबर 2024 |
|---|---|
| आयुष्मान वय वंदना स्वास्थ्य बीमा राशि | ₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष (70+ आयु वर्ग) |
| कुल हरित हाइड्रोजन ऑफटेक प्रतिबद्धता | 5.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) |
| राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2030 लक्ष्य | 5 MMTPA उत्पादन व 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा |
| अधिकरणों से संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद | अनुच्छेद 323A एवं 323B (42वां संशोधन, 1976) |
| NCLT एवं NCLAT का गठन आधार | कंपनी अधिनियम, 2013 |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
👆 सही विकल्प पर क्लिक करें — तुरंत पता चलेगा सही है या गलत।
Q1 ‘आयुष्मान वय वंदना योजना’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
Q2 राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत वर्ष 2030 तक भारत का वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्य क्या है?
Q3 भारतीय कंपनियों द्वारा हस्ताक्षरित 5.5 लाख MTPA हरित हाइड्रोजन ऑफटेक अनुबंधों में से कितना हिस्सा निर्यात के लिए लक्षित है?
Q4 भारतीय संविधान के किस संशोधन अधिनियम द्वारा अधिकरणों (Tribunals) से संबंधित ‘भाग XIV-A’ को जोड़ा गया था?
Q5 सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में NCLT और NCLAT में किस प्रकार की नियुक्तियों पर आपत्ति जताते हुए UPSC/SSC के माध्यम से भर्ती की सिफारिश की है?







