UNGA में क्यूबा प्रतिबंध पर भारत का रुख, भारत-सऊदी SPC बैठक और कतर वार्ता
संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर प्रतिबंध हटाने के पक्ष में भारत का मतदान, रियाद में भारत-सऊदी अरब रणनीतिक बैठक और दोहा में 5वां भारत-कतर परामर्श संपन्न।
⭐ मुख्य बिंदु
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के प्रस्ताव के पक्ष में भारत ने मतदान किया।
- यूएनजीए में यह प्रस्ताव 130 मतों के भारी समर्थन से पारित हुआ, जबकि 17 ने विरोध किया और 25 देश अनुपस्थित रहे।
- भारत ने किसी भी देश द्वारा घरेलू कानूनों के बहिर्क्षेत्रीय प्रभाव और एकतरफा प्रतिबंधों को संप्रभुता के विरुद्ध बताया।
- रियाद में भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद (SPC) की अर्थव्यवस्था और निवेश समिति की दूसरी बैठक आयोजित हुई।
- सऊदी अरब में आयोजित 8वें फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
- दोहा में भारत और कतर के बीच 5वां विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) ऊर्जा और फिनटेक सहयोग के एजेंडे के साथ संपन्न हुआ।
- कतर भारत को द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार 14 बिलियन डॉलर है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत ने संप्रभुता, बहुपक्षवाद और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई अहम कदम उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ भारत का दृढ़ रुख, पश्चिम एशिया में सऊदी अरब के साथ रणनीतिक साझेदारी परिषद (SPC) की महत्वपूर्ण बैठक और कतर के साथ 5वां विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) वैश्विक राजनीति व परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं।
1. यूएनजीए में क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव का भारत ने किया समर्थन
क्या हुआ?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 79वें सत्र में अमेरिका द्वारा क्यूबा पर लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग वाले वार्षिक प्रस्ताव पर मतदान हुआ। 193 सदस्यीय महासभा में 130 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, 17 ने विरोध में मत दिया तथा 25 देश मतदान से अनुपस्थित रहे। भारत ने संप्रभु समानता और अंतरराष्ट्रीय विधि के सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए इस प्रस्ताव के पक्ष में अपना मत दर्ज कराया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने वक्तव्य देते हुए कहा कि किसी भी देश द्वारा घरेलू कानूनों का बहिर्क्षेत्रीय (extraterritorial) विस्तार अन्य राष्ट्रों की संप्रभुता और आर्थिक विकास में बाधा डालता है।
पृष्ठभूमि
अमेरिका ने क्यूबा में 1959 की क्रांति और अमेरिकी परिसंपत्तियों के राष्ट्रीयकरण के उपरांत 1960 के दशक की शुरुआत (औपचारिक रूप से फरवरी 1962) में व्यापारिक प्रतिबंध लगाए थे। क्यूबा पिछले तीन दशकों से संयुक्त राष्ट्र में इस प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग करता रहा है। भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के संस्थापक सदस्य के रूप में हमेशा से विकासशील देशों पर एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है, क्योंकि इससे आवश्यक दवाओं, खाद्य आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर मानवीय प्रभाव पड़ता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 18: महासभा में महत्वपूर्ण विषयों पर दो-तिहाई बहुमत और सामान्य मामलों पर उपस्थित सदस्यों के साधारण बहुमत से निर्णय लिए जाते हैं।
- प्रस्तावों की कानूनी बाध्यता: यूएनएससी (UNSC) के अध्याय VII के अंतर्गत पारित प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी होते हैं, जबकि यूएनजीए (UNGA) के प्रस्ताव सामान्यतः अनुशंसात्मक (recommending nature) होते हैं, हालांकि उनका नैतिक और राजनीतिक प्रभाव अत्यधिक होता है।
- बहिर्क्षेत्रीय प्रतिबंध (Secondary Sanctions): ऐसे प्रतिबंध जो तीसरे पक्ष के देशों की कंपनियों पर भी लागू होने का दावा करते हैं, संप्रभु समानता के वैश्विक सिद्धांत का उल्लंघन माने जाते हैं।
2. भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद (SPC) की मंत्रिस्तरीय बैठक
क्या हुआ?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान अल-सऊद ने रियाद में भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद (Strategic Partnership Council - SPC) के तहत ‘अर्थव्यवस्था और निवेश समिति’ की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक 8वें फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) सम्मेलन के साथ-साथ आयोजित की गई।
चार प्रमुख कार्य समूहों की समीक्षा
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए गठित चार संयुक्त कार्य समूहों (Joint Working Groups - JWGs) की प्रगति की समीक्षा की गई:
| संयुक्त कार्य समूह (JWG) | प्रमुख फोकस क्षेत्र |
|---|---|
| कृषि और खाद्य सुरक्षा | आपूर्ति शृंखला लचीलापन, कृषि व्यापार और उर्वरक आपूर्ति |
| ऊर्जा | कच्चा तेल, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रिड कनेक्टिविटी |
| प्रौद्योगिकी एवं आईटी | डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक और स्टार्टअप सहयोग |
| उद्योग और अवसंरचना | रिफाइनरी परियोजनाएं, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर |
पृष्ठभूमि
रणनीतिक साझेदारी परिषद (SPC) की स्थापना अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित समझौते के माध्यम से हुई थी। भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी के दो मुख्य स्तंभ हैं: पहला, राजनीतिक-सुरक्षा-सामाजिक-सांस्कृतिक स्तंभ (जिसकी सह-अध्यक्षता दोनों देशों के विदेश मंत्री करते हैं) और दूसरा, अर्थव्यवस्था एवं निवेश स्तंभ (जिसकी सह-अध्यक्षता वाणिज्य/ऊर्जा मंत्री करते हैं)। सऊदी अरब भारत में 100 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुका है, जिसमें वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी परियोजना भी शामिल है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- आईमेक (IMEC): भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (India-Middle East-Europe Economic Corridor) में सऊदी अरब एक प्रमुख पारगमन भागीदार है।
- द्विपक्षीय व्यापार: सऊदी अरब भारत के शीर्ष कच्चे तेल और एलपीजी आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 40 बिलियन डॉलर से अधिक का है।
- फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII): इसे अक्सर ‘रेगिस्तान का दावोस’ (Davos in the Desert) भी कहा जाता है, जो वैश्विक निवेशकों का प्रमुख मंच है।
3. दोहा में 5वां भारत-कतर विदेश कार्यालय परामर्श (FOC)
क्या हुआ?
भारत और कतर के बीच 5वें दौर का विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) दोहा में संपन्न हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में सचिव (सीपीवी और ओआईए) अरुण कुमार चटर्जी ने किया, जबकि कतर की ओर से विदेश मंत्रालय के महासचिव डॉ. अहमद हसन अल-हम्मादी ने सह-अध्यक्षता की।
प्रमुख चर्चाएं और रणनीतिक महत्व
बैठक में दोनों देशों ने 14 बिलियन डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा साझेदारी, फिनटेक, स्टार्टअप और निवेश अवसरों की समीक्षा की। भारत के लिए कतर एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का सबसे बड़ा दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता है। दोनों पक्षों ने हाल ही में पेट्रोनेट एलएनजी और कतरएनर्जी के बीच 2048 तक के लिए विस्तारित 7.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) के एलएनजी अनुबंध के क्रियान्वयन की सराहना की। इसके अतिरिक्त कतर में रहने वाले 8 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों के कल्याण और कौशल गतिशीलता पर भी सकारात्मक विमर्श हुआ।
परीक्षा टिप: खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में कतर भारत की ऊर्जा सुरक्षा का केंद्रीय आधार है, जबकि सऊदी अरब और यूएई रणनीतिक निवेश व व्यापार के प्राथमिक केंद्र हैं।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| यूएनजीए क्यूबा प्रस्ताव मतदान | 130 पक्ष, 17 विपक्ष, 25 अनुपस्थित |
|---|---|
| भारत-सऊदी SPC की स्थापना | अक्टूबर 2019 |
| भारत-कतर वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार | लगभग 14 बिलियन अमेरिकी डॉलर |
| फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) स्थल | रियाद, सऊदी अरब |
| कतर में भारतीय समुदाय की आबादी | 8 लाख से अधिक |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव पर भारत का क्या रुख रहा?
Q2 भारत-सऊदी अरब रणनीतिक साझेदारी परिषद (Strategic Partnership Council - SPC) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
Q3 हाल ही में आयोजित भारत-सऊदी अरब SPC की ‘अर्थव्यवस्था और निवेश समिति’ की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक किस शहर में आयोजित हुई?
Q4 हाल ही में 5वें भारत-कतर विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) का आयोजन दोहा में हुआ। भारत कतर से मुख्य रूप से किस वस्तु का सबसे बड़ा आयातक है?
Q5 संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के प्रस्तावों की कानूनी प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?







