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12वां ब्रिक्स संसदीय मंच नई दिल्ली में शुरू: संसदीय कूटनीति और आतंकवाद पर भारत का रुख

नई दिल्ली के संविधान सदन में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आगाज़ हुआ। भारत ने जन-केंद्रित विकास, आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस और वैश्विक सुधारों पर बल दिया।

⭐ मुख्य बिंदु

  • नई दिल्ली के संविधान सदन में 26-27 अक्टूबर 2026 को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन किया जा रहा है।
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता कर रहे हैं।
  • मंच का मुख्य विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों का संवर्धन’ (Fostering Parliaments for People-Centric Development) है।
  • सम्मेलन में लचीलापन, नवाचार (नैतिक एआई), संसदीय सहयोग और सतत विकास के चार प्रमुख स्तंभों पर चर्चा हो रही है।
  • फोरम से इतर भारत और रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने आतंकवाद के विरुद्ध और यूएनएससी सुधारों पर द्विपक्षीय बातचीत की।
  • भारत और रूस वर्ष 2027 में अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे करेंगे।
  • भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को राज्यनीति के साधन के रूप में उपयोग करना कतई स्वीकार्य नहीं है।
  • भारत ने वैश्विक संघर्षों के स्थायी समाधान हेतु युद्ध के बजाय केवल संवाद और कूटनीति को एकमात्र मार्ग बताया।

12वां ब्रिक्स संसदीय मंच: नई दिल्ली में संसदीय कूटनीति का नया अध्याय

भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के सेंट्रल हॉल में 26 और 27 अक्टूबर 2026 को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (12th BRICS Parliamentary Forum) का भव्य आयोजन शुरू हुआ। इस दो-दिवसीय प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। इस मंच में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और आमंत्रित 10 साझीदार देशों के संसदों के पीठासीन अधिकारी, सांसद और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।

क्या हुआ: मुख्य बिंदु और केंद्रीय विषय

सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों का संवर्धन’ (Fostering Parliaments for People-Centric Development) निर्धारित किया गया है। सम्मेलन के दौरान चार प्रमुख उच्चस्तरीय सत्रों में विचार-विमर्श की रूपरेखा तैयार की गई है:

  • लचीलापन (Resilience): भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के मुकाबले लोकतांत्रिक और संसदीय संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना।
  • नवाचार (Innovation): नैतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Ethical AI) और डिजिटल परिवर्तन के लिए विधायी ढांचा तैयार करना।
  • सहयोग (Cooperation): संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और बेहतरीन विधायी प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान।
  • सततता (Sustainability): समावेशी आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संतुलित नीतियां बनाना।

पृष्ठभूमि: ब्रिक्स संसदीय मंच का महत्व

ब्रिक्स संसदीय मंच सदस्य राष्ट्रों के विधायी निकायों के बीच संवाद का सर्वोच्च मंच है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों में राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर जो कूटनीतिक घोषणाएं होती हैं, उन्हें अपने-अपने देशों में व्यावहारिक कानून, बजट आवंटन और जनहितैषी नीतियों में बदलने का कार्य संसदों द्वारा ही किया जाता है। विस्तारित ब्रिक्स अब विश्व की लगभग 50% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक जीडीपी (क्रय शक्ति समता यानी PPP आधार पर) में 40% से अधिक तथा वैश्विक व्यापार में 26% की हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में संसदों की भूमिका बहुपक्षीय शासन को लोकतांत्रिक वैधता प्रदान करने में अत्यंत निर्णायक है।

भारत-रूस संसदीय वार्ता और साझेदार देशों संग द्विपक्षीय संवाद

मंच के उद्घाटन से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ (State Duma) के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के नेतृत्व वाले उच्चस्तरीय रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसके साथ ही मिस्र, क्यूबा और बेलारूस के संसदीय नेताओं के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत संपन्न हुई।

द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख आयाम

  • आतंकवाद के विरुद्ध साझा संकल्प: भारत और रूस ने वैश्विक मंचों पर समन्वय बढ़ाने और आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करने पर जोर दिया।
  • कूटनीतिक संबंधों के 80 वर्ष: दोनों पक्षों ने रेखांकित किया कि वर्ष 2027 में भारत और रूस अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे करेंगे। यह साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ (Special and Privileged Strategic Partnership) है।
  • यूएनएससी में भारत का समर्थन: रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने पूर्ण और निरंतर समर्थन को दोहराया।
  • संस्थागत संसदीय सहयोग: भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की नियमित बैठकों तथा युवा व महिला सांसदों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

वैश्विक शांति और आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट कूटनीतिक संदेश

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में चल रहे संघर्षों के बीच भारत ने वैश्विक मंचों पर अपना स्पष्ट कूटनीतिक दृष्टिकोण दोहराया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र दिवस और वैश्विक सम्मेलनों के अवसर पर स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

भारत के कूटनीतिक रुख के प्रमुख बिंदु

1. स्टेटक्राफ्ट के हथियार के रूप में आतंकवाद अस्वीकार्य: भारत ने दृढ़ता से कहा कि आतंकवाद को ‘राज्यनीति के साधन’ (Instrument of Statecraft) के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। जब तक कुछ देश आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति नहीं अपनाते और राजनीतिक नफे-नुकसान को प्राथमिकता देते रहेंगे, तब तक वैश्विक शांति असंभव है।

2. शांति की अविभाज्यता (Indivisibility of Peace): भारत ने रेखांकित किया कि ‘कहीं भी होने वाला युद्ध, हर जगह की शांति के लिए खतरा है’ (War anywhere threatens peace everywhere)। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्षों का समाधान युद्धक्षेत्र में नहीं, बल्कि केवल संवाद और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) के जरिए ही संभव है।

3. सुधारित बहुपक्षवाद (Reformed Multilateralism): भारत ने संयुक्त राष्ट्र को मूकदर्शक बने रहने के बजाय सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया। सुरक्षा परिषद और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप सुधार किए बिना ग्लोबल साउथ की आवाज को न्याय नहीं मिल सकता।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विश्लेषण

पहलूविवरण
आयोजन व स्थल12वां ब्रिक्स संसदीय मंच, संविधान सदन (नई दिल्ली)
अध्यक्षताओम बिरला (लोकसभा अध्यक्ष)
केंद्रीय थीमFostering Parliaments for People-Centric Development
प्रमुख चर्चा स्तंभResilience, Innovation (Ethical AI), Cooperation, Sustainability
रूस का विधायी सदनस्टेट ड्यूमा (निचला सदन), फेडरेशन काउंसिल (उच्च सदन)
भारत का कूटनीतिक दृष्टिकोणसुधारित बहुपक्षवाद, संवाद-कूटनीति, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सम्मेलन का नाम12वां ब्रिक्स संसदीय मंच (2026)
आयोजन स्थलसंविधान सदन (सेंट्रल हॉल), नई दिल्ली
फोरम की मुख्य थीमFostering Parliaments for People-Centric Development
रूसी संसद का निचला सदनस्टेट ड्यूमा (State Duma)
भारत-रूस कूटनीतिक संबंधवर्ष 2027 में 80 वर्ष पूर्ण होंगे
ब्रिक्स का वैश्विक आर्थिक हिस्सापीपीपी आधार पर वैश्विक जीडीपी का 40% से अधिक

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (12th BRICS Parliamentary Forum) 2026 का आयोजन किस शहर में किया गया?

Q2 नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की मुख्य थीम (विषय) क्या है?

Q3 हाल ही में चर्चा में रहे व्याचेस्लाव वोलोदिन किस देश की संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ (State Duma) के अध्यक्ष हैं?

Q4 ब्रिक्स (BRICS) समूह का पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन किस वर्ष और किस देश में आयोजित हुआ था?

Q5 भारत की विदेश नीति के संदर्भ में ‘सुधारित बहुपक्षवाद’ (Reformed Multilateralism) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

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