राष्ट्रीय

डिजिटल कृषि मिशन के तहत 11 करोड़ किसान आईडी, 7वां भारत-जर्मनी परामर्श और करतारपुर समझौता

डिजिटल कृषि मिशन ने 11 करोड़ किसान आईडी का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया, वहीं 7वें भारत-जर्मनी परामर्श और करतारपुर गलियारा समझौते पर अहम प्रगति हुई।

⭐ मुख्य बिंदु

  • डिजिटल कृषि मिशन के तहत 11 करोड़ किसान डिजिटल आईडी बनाने का लक्ष्य समय से 5 महीने पहले पूरा किया गया।
  • एग्रीस्टैक (AgriStack) के तीन बुनियादी घटक किसान रजिस्ट्री, बोई गई फसल रजिस्ट्री और भू-संदर्भित मानचित्र हैं।
  • नई दिल्ली में आयोजित 7वें भारत-जर्मनी IGC की सह-अध्यक्षता पीएम नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने की।
  • भारत और जर्मनी के बीच ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप, रक्षा वर्गीकृत सूचना संरक्षण तथा आपराधिक मामलों में MLAT समझौता हुआ।
  • जर्मनी ने अपनी ‘फोकस ऑन इंडिया’ नीति के तहत भारतीय कुशल कामगारों के लिए वीज़ा कोटा बढ़ाकर 90,000 किया।
  • भारत और पाकिस्तान ने श्री करतारपुर साहिब गलियारा समझौते की वैधता को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ाया।
  • करतारपुर गलियारा डेरा बाबा नानक (गुरदासपुर, भारत) को गुरुद्वारा दरबार साहिब (नरोवाल, पाकिस्तान) से जोड़ता है।

राष्ट्रीय स्तर पर कृषि तकनीक, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय धार्मिक कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तीन अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने डिजिटल कृषि मिशन के तहत एक प्रमुख कीर्तिमान स्थापित किया है, नई दिल्ली में 7वें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (IGC) का आयोजन हुआ है, तथा भारत एवं पाकिस्तान ने ऐतिहासिक करतारपुर साहिब गलियारा समझौते को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है।

1. डिजिटल कृषि मिशन: 11 करोड़ किसान आईडी तैयार करने का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल

क्या हुआ?

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) के अंतर्गत देश भर में 11 करोड़ डिजिटल किसान आईडी (Farmer IDs) सृजित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा (31 मार्च 2027) से पाँच माह पूर्व ही सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया गया है। इस डिजिटल पहचान प्रणाली के माध्यम से 6 करोड़ से अधिक किसान केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न कृषि कल्याण योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त कर चुके हैं।

पृष्ठभूमि और संरचना

सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹2,817 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ ‘डिजिटल कृषि मिशन’ को स्वीकृति प्रदान की थी। इस मिशन का मुख्य आधार कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (AgriStack) तैयार करना है। एग्रीस्टैक मुख्य रूप से तीन बुनियादी स्तंभों पर टिका है:

  • किसान रजिस्ट्री (Farmers Registry): प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान (Farmer ID) प्रदान करना, जो उनके आधार और भूमि अभिलेखों से संबद्ध होती है।
  • फसल बोआई रजिस्ट्री (Crop Sown Registry): मोबाइल आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से प्रत्येक मौसम में बोई गई वास्तविक फसलों का सटीक डेटा दर्ज करना।
  • भू-संदर्भित ग्रामीण मानचित्र (Geo-referenced Village Maps): भूमि भूखंडों (कडैस्ट्रल मैप्स) का जीपीएस और रिमोट सेंसिंग के जरिए सटीक भौगोलिक सीमांकन।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • पारदर्शिता और डीबीटी: इससे पीएम-किसान (PM-KISAN), फसल बीमा (PMFBY) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद में फर्जीवाड़े और दोहराव पर पूरी तरह रोक लगेगी।
  • भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR): डिजिटल कृषि के अंतर्गत बहुभाषी एआई-संचालित कृषि सलाहकार तंत्र को एकीकृत किया जा रहा है।
  • वित्तीय समावेशन: बैंकों द्वारा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और संस्थागत ऋण स्वीकृत करने की प्रक्रिया डिजिटल और त्वरित हो जाएगी।

2. 7वां भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (7th India-Germany IGC)

क्या हुआ?

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के संघीय चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने 7वें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (7th IGC) की संयुक्त रूप से सह-अध्यक्षता की। इस द्विपक्षीय शिखर वार्ता का मुख्य आदर्श वाक्य (Motto) ‘नवाचार, गतिशीलता और स्थिरता के साथ मिलकर विकास’ (Growing Together with Innovation, Mobility and Sustainability) था।

पृष्ठभूमि

भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी वर्ष 2000 में स्थापित हुई थी, और अंतर-सरकारी परामर्श (IGC) तंत्र की शुरुआत 2011 में हुई थी। जर्मनी एकमात्र ऐसा यूरोपीय देश है जिसके साथ भारत कैबिनेट स्तर की इस द्विपक्षीय परामर्श व्यवस्था का संचालन करता है। इस बैठक के साथ-साथ नई दिल्ली में 18वें एशिया-पैसिफिक जर्मन व्यापार सम्मेलन (APK 2024) का आयोजन भी किया गया।

प्रमुख समझौते व परिणाम

  • नवाचार और प्रौद्योगिकी रोडमैप: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना।
  • भारत-जर्मन हरित हाइड्रोजन रोडमैप: हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और व्यापार के लिए संयुक्त मानकों और आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण।
  • सुरक्षा और रक्षा सहयोग: आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT) और वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान व संरक्षण पर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  • ‘फोकस ऑन इंडिया’ रणनीति: जर्मन कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस दस्तावेज के तहत भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए वार्षिक वीज़ा कोटा 20,000 से बढ़ाकर 90,000 करने की पहल की गई।
  • हरित शहरी गतिशीलता (GUMP-II): पर्यावरण अनुकूल शहरी परिवहन के लिए तकनीकी साझेदारी का विस्तार।

3. श्री करतारपुर साहिब गलियारा समझौते का 5 वर्षों के लिए विस्तार

क्या हुआ?

भारत और पाकिस्तान ने राजनयिक माध्यमों से श्री करतारपुर साहिब गलियारा (Sri Kartarpur Sahib Corridor) समझौते की वैधता को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने पर औपचारिक सहमति व्यक्त की है।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

यह मूल समझौता 24 अक्टूबर 2019 को पांच वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया था। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक अवसर पर नवंबर 2019 में इस गलियारे का उद्घाटन किया गया था।

  • भौगोलिक अवस्थिति: यह गलियारा भारत के पंजाब राज्य के गुरदासपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक ‘डेरा बाबा नानक’ को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित ‘गुरुद्वारा दरबार साहिब’ से जोड़ता है।
  • धार्मिक महत्व: गुरुद्वारा दरबार साहिब वह पवित्र स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष व्यतीत किए थे और यहीं वे ज्योति जोत समाए थे। यह स्थल रावी नदी के पार स्थित है।
  • वीजा-मुक्त व्यवस्था: समझौते के तहत भारतीय तीर्थयात्रियों और ओसीआई कार्डधारकों को बिना वीजा के केवल वैध पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक परमिट के आधार पर सुबह जाकर शाम को लौटने की सुविधा मिलती है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

भारत ने इस नवीनीकरण के अवसर पर पाकिस्तान से प्रत्येक तीर्थयात्री पर लगाए जाने वाले 20 अमेरिकी डॉलर के सेवा शुल्क (Service Fee) को पूरी तरह समाप्त करने का अनुरोध पुनः दोहराया है, ताकि श्रद्धालुओं पर आर्थिक बोझ न पड़े। यह व्यवस्था दोनों देशों के मध्य 1974 के ‘धार्मिक स्थलों की यात्रा से संबंधित द्विपक्षीय प्रोटोकॉल’ से इतर एक विशेष व्यवस्था के तहत संचालित होती है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

डिजिटल कृषि मिशन का कुल परिव्यय₹2,817 करोड़
निर्मित किसान आईडी (Farmer IDs)11 करोड़ (समय पूर्व पूर्ण)
भारत-जर्मनी परामर्श का संस्करण7वां अंतर-सरकारी परामर्श (7th IGC)
जर्मनी कुशल कामगार वार्षिक वीज़ा कोटा90,000 (पूर्व में 20,000)
करतारपुर गलियारा मूल समझौता तिथि24 अक्टूबर 2019
करतारपुर समझौते की विस्तारित अवधि5 वर्ष (2024 से 2029)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

स्कोर 0 / 5

👆 सही विकल्प पर क्लिक करें — तुरंत पता चलेगा सही है या गलत।

Q1 केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ‘डिजिटल कृषि मिशन’ (Digital Agriculture Mission) का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?

Q2 कृषि क्षेत्र के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) के प्रमुख घटकों में कौन-सा शामिल नहीं है?

Q3 7वें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (7th IGC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सत्य है?

Q4 भारत और पाकिस्तान के बीच श्री करतारपुर साहिब गलियारा समझौता मूल रूप से किस वर्ष हस्ताक्षरित हुआ था?

Q5 श्री करतारपुर साहिब गलियारा भारत के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के किस जिले में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है?

स्रोत