RBI का ₹50,000 करोड़ का VRR ऑक्शन, भारत-पोलैंड व्यापार समझौता और सामाजिक सहायता योजना
आरबीआई द्वारा तरलता प्रबंधन हेतु ₹50,000 करोड़ का VRR ऑक्शन, भारत-पोलैंड व्यापार 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य और ₹53,428 करोड़ की सामाजिक सहायता योजना को मंजूरी।
⭐ मुख्य बिंदु
- आरबीआई ने 23 अक्टूबर 2026 को ₹50,000 करोड़ की 3-दिवसीय परिवर्तनीय दर रेपो (VRR) नीलामी आयोजित की।
- बैंकिंग प्रणाली में तरलता की तात्कालिक कमी को दूर करने के लिए VRR का संचालन किया गया।
- आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री से पूर्व ₹33,000 करोड़ की हामीदारी नीलामी भी पूरी की।
- भारत और पोलैंड ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक दोगुना करने का संयुक्त लक्ष्य तय किया।
- पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21-23 अक्टूबर 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहे।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने NSAP का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ करने को मंजूरी दी।
- सामाजिक सहायता योजना के लिए 2026-27 से 2030-31 तक ₹53,428 करोड़ का बजटीय आवंटन स्वीकृत हुआ।
- संशोधित योजना के तहत दिव्यांग पेंशन हेतु पात्रता सीमा 80% से घटाकर 40% कर दी गई तथा न्यूनतम आयु सीमा समाप्त की गई।
भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय तंत्र में नीतिगत स्थिरता, संस्थागत तरलता और सामाजिक-आर्थिक कल्याण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई बड़े निर्णय सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में नकदी के प्रवाह को संतुलित बनाए रखने के लिए 3-दिवसीय परिवर्तनीय दर रेपो (VRR) नीलामी की घोषणा की है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भारत और पोलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹53,428 करोड़ के परिव्यय के साथ ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ के पुनर्गठन को स्वीकृति दी गई है।
1. बैंकिंग तरलता प्रबंधन: RBI की ₹50,000 करोड़ की VRR नीलामी और G-Sec हामीदारी
क्या हुआ?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नकदी की तात्कालिक स्थिति का आकलन करते हुए 23 अक्टूबर 2026 को ₹50,000 करोड़ की अधिसूचित राशि के लिए 3-दिवसीय परिवर्तनीय दर रेपो (Variable Rate Repo - VRR) नीलामी आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस नीलामी का प्रत्यावर्तन (reversal) 26 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities - G-Secs) की बिक्री से पूर्व ₹33,000 करोड़ की हामीदारी (underwriting) नीलामी भी संपन्न की, जिसमें प्राथमिक डीलर (PDs) और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) शामिल हुए।
पृष्ठभूमि व कारण
त्योहारी सीजन, अग्रिम कर भुगतान और ऋण मांग में वृद्धि के कारण बैंकिंग प्रणाली में तरलता पर दबाव देखा जा रहा था। जब बैंकों के पास नकदी की कमी होती है, तो ओवरनाइट कॉल मनी रेट (Call Money Rate) नीतिगत रेपो दर से ऊपर जाने का जोखिम रहता है। आरबीआई तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के अंतर्गत VRR नीलामी का सहारा लेकर प्रणाली में आवश्यक नकदी (Liquidity Injection) डालता है, जिससे अल्पकालिक ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहे।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- VRR बनाम VRRR: जब प्रणाली में नकदी की कमी हो, तो आरबीआई Variable Rate Repo (VRR) के जरिए नकदी डालता है। जब बाजार में अधिशेष तरलता हो, तो उसे सोखने के लिए Variable Rate Reverse Repo (VRRR) का संचालन किया जाता है।
- तरलता समायोजन सुविधा (LAF): यह आरबीआई का एक प्रमुख मौद्रिक उपकरण है, जिसके तहत रेपो और स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दरों के माध्यम से तरलता का प्रबंधन किया जाता है।
- प्राथमिक डीलर (Primary Dealers): ये वे संस्थागत मध्यस्थ हैं जो सरकारी प्रतिभूतियों के प्राथमिक निर्गम में हामीदारी प्रदान करते हैं और द्वितीयक बाजार में तरलता बनाए रखते हैं।
2. भारत-पोलैंड आर्थिक साझेदारी: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
क्या हुआ?
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की 21-23 अक्टूबर 2026 की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय, व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति दी गई। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का औपचारिक लक्ष्य निर्धारित किया। पोलैंड ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और $10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में जारी प्रयासों की सराहना की।
पृष्ठभूमि व रणनीतिक महत्व
अगस्त 2024 में दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) का दर्जा दिया गया था। मध्य यूरोप में पोलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक और निवेश साझेदार है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और यूरोप-भारत व्यापार संबंधों को मजबूती प्रदान करने में पोलैंड एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
प्रमुख सहयोग क्षेत्र
- विनिर्माण एवं आपूर्ति श्रृंखला: पोलिश कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश का निमंत्रण दिया गया।
- खाद्य प्रसंस्करण व कृषि प्रौद्योगिकी: कृषि अवसंरचना और सतत कृषि तकनीकों में तकनीकी हस्तांतरण पर बल।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था: फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा में सहयोग।
3. प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना: ₹53,428 करोड़ के साथ सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
क्या हुआ?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले 5 वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इस योजना को अब ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ (PM Samajik Sahayata Yojana) के रूप में पुनर्गठित किया गया है, जिसके लिए ₹53,428 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है।
दिव्यांगजन पेंशन में ऐतिहासिक सुधार
इस योजना के अंतर्गत दिव्यांगता पेंशन (Disability Pension) में क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए हैं:
- बेंचमार्क दिव्यांगता में कमी: पात्रता के लिए दिव्यांगता सीमा को 80% से घटाकर ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016’ के अनुरूप 40% कर दिया गया है।
- आयु सीमा की समाप्ति: 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है; अब पात्र लाभार्थी जन्म से ही सहायता प्राप्त करने के हकदार होंगे।
- लाभार्थी संख्या में भारी वृद्धि: सुधारों के परिणामस्वरूप दिव्यांगता पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर लगभग 27.48 लाख होने का अनुमान है।
- मासिक सहायता दर: 0-79 वर्ष की आयु के लाभार्थियों के लिए केंद्रीय सहायता ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों के लिए ₹625 प्रति माह निर्धारित की गई है।
स्टैटिक GK व संवैधानिक संदर्भ
- अनुच्छेद 41 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व): संविधान का यह अनुच्छेद राज्य को अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर बेरोजगारी, बुढ़ापा, बीमारी और निशक्तता की दशाओं में लोक सहायता पाने का अधिकार सुरक्षित करने का निर्देश देता है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): योजना के अंतर्गत सभी वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के आधार-संबद्ध बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है, जिससे वित्तीय रिसाव शून्य होता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| VRR नीलामी अधिसूचित राशि | ₹50,000 करोड़ |
|---|---|
| G-Sec हामीदारी नीलामी आकार | ₹33,000 करोड़ |
| भारत-पोलैंड व्यापार दोगुना करने का वर्ष | 2030 |
| प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना अवधि | 2026-27 से 2030-31 (5 वर्ष) |
| सामाजिक सहायता योजना कुल परिव्यय | ₹53,428 करोड़ |
| संशोधित दिव्यांगता पेंशन बेंचमार्क | 40% (RPwD अधिनियम 2016 अनुसार) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 बैंकिंग प्रणाली में अल्पकालिक तरलता (Liquidity Injection) बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निम्नलिखित में से किस साधन का उपयोग किया जाता है?
Q2 हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पुनर्गठित ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ (पूर्ववर्ती NSAP) के लिए 2026-27 से 2030-31 तक कितनी राशि का परिव्यय स्वीकृत किया गया है?
Q3 प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के तहत संशोधित दिव्यांगता पेंशन के लिए न्यूनतम दिव्यांगता प्रतिशत (बेंचमार्क) कितना तय किया गया है?
Q4 भारत और पोलैंड ने हालिया उच्चस्तरीय वार्ता में किस वर्ष तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है?
Q5 भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और निशक्तता की दशाओं में लोक सहायता (Public Assistance) का अधिकार सुनिश्चित करने का निर्देश देता है?







