क्वांटम संचार में 1,000 किमी की उपलब्धि और 400 स्पेस स्टार्टअप्स से भारत की तकनीकी छलांग
भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत 1,000 किमी सुरक्षित संचार नेटवर्क स्थापित किया और 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स के साथ अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 13 अरब डॉलर पार कर गई।
⭐ मुख्य बिंदु
- भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत 1,000 किमी सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को ₹6,003 करोड़ के बजट के साथ 2023 से 2031 तक 8 वर्षों के लिए स्वीकृत किया गया है।
- भारतीय जैव-अर्थव्यवस्था 195 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर गई है और 2030 तक 300 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।
- देश में अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स की संख्या 2014 के 1 से बढ़कर 400 से अधिक हो गई है।
- भारत का घरेलू अंतरिक्ष बाजार वर्तमान में $13 अरब का है, जिसके 2030 तक $40 अरब होने का अनुमान है।
- संशोधित FDI नीति के तहत उपग्रह निर्माण में स्वचालित मार्ग से 74% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है।
- विदेश मंत्रालय के NEST प्रभाग और CSIR ने मिलकर ग्लोबल साउथ के 29 देशों के लिए टेक फैमिलियराइजेशन कार्यक्रम आयोजित किया।
- भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिदृश्य में रणनीतिक आत्मनिर्भरता और तकनीकी संप्रभुता को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के तहत समय सीमा से काफी पहले 1,000 किलोमीटर लंबी क्वांटम-सुरक्षित संचार प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया है। इसके साथ ही भारतीय जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) 195 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गई है तथा घरेलू अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या 400 के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है।
1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: 1,000 किमी क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का सफल प्रदर्शन
क्या हुआ?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के आठ वर्षीय लक्ष्य (2,000 किमी) के मुकाबले मात्र तीन वर्षों में ही 1,000 किलोमीटर लंबा क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क (Quantum Key Distribution - QKD) सफलतापूर्वक तैयार और प्रदर्शित कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय जैव-अर्थव्यवस्था का आकार 195 अरब डॉलर को पार कर गया है, जिसे 2030 तक 300 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 6,003 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ आठ वर्षों (2023-24 से 2030-31) के लिए मंजूरी दी गई थी। इसका क्रियान्वयन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा किया जा रहा है। मिशन का उद्देश्य क्वांटम कम्प्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग व मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री व उपकरणों के चार विषयगत कार्यक्षेत्रों (Thematic Hubs - T-Hubs) में स्वदेशी क्षमता विकसित करना है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD): यह भौतिकी के सिद्धांतों (क्वांटम यांत्रिकी) पर आधारित एक सुरक्षित संचार तकनीक है, जिसमें फोटॉन (प्रकाश कणों) का उपयोग कर एन्क्रिप्शन कुंजियों का आदान-प्रदान किया जाता है। यदि कोई तीसरा पक्ष इसे हैक करने का प्रयास करता है, तो ‘नो-क्लोनिंग प्रमेय’ और ऑब्जर्वर प्रभाव के कारण डेटा की स्थिति बदल जाती है तथा सेंधमारी का तुरंत पता चल जाता है।
- रणनीतिक उपयोग: यह नेटवर्क रक्षा संचार, बैंकिंग व वित्तीय लेनदेन तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना (Critical Information Infrastructure) को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर आधारित साइबर हमलों से सुरक्षित बनाएगा।
- बायो-ई3 नीति (BioE3): अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) नीति भारत को हरित जैव-विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने पर केंद्रित है।
2. भारत का अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: 400 कंपनियों के साथ 13 अरब डॉलर का बाजार
क्या हुआ?
अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक सुधारों के फलस्वरूप भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स की संख्या 2014 के मात्र 1 से बढ़कर 400 से अधिक हो गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत का घरेलू अंतरिक्ष उद्योग वर्तमान में 13 अरब डॉलर मूल्य का हो चुका है और 2030 तक इसके 40 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
पृष्ठभूमि
वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 जारी होने के बाद निजी निवेश में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) निजी क्षेत्र की गतिविधियों के लिए एकल-खिड़की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है। केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड (VCF) और उदार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति भी लागू की है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- संशोधित FDI नीति: उपग्रह निर्माण और संचालन में स्वचालित मार्ग से 74% तक, प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles) और स्पेसपोर्ट में 49% तक, तथा उपग्रह घटकों के निर्माण में 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: इसरो अपनी परिपक्व तकनीकों (जैसे लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान - SSLV) को उद्योग जगत और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) जैसी कंपनियों को व्यावसायिक उत्पादन के लिए सौंप रहा है, जिससे इसरो गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण पर केंद्रित रह सके।
- लक्ष्य: भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) स्थापित करना और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारना है।
3. MEA–CSIR टेक फैमिलियराइजेशन प्रोग्राम: ग्लोबल साउथ के साथ विज्ञान कूटनीति
क्या हुआ?
विदेश मंत्रालय (MEA) के ‘न्यू, इमर्जिंग एंड स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजीज’ (NEST) प्रभाग और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ग्लोबल साउथ के देशों के लिए संयुक्त रूप से ‘टेक फैमिलियराइजेशन प्रोग्राम’ की शुरुआत की। इसमें 29 देशों के 33 राजदूतों और राजनयिकों ने भारत की स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं का अवलोकन किया।
पृष्ठभूमि व महत्व
राजनयिकों को नई दिल्ली स्थित CSIR की प्रमुख प्रयोगशालाओं—केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और जीनोमिक्स एवं एकीकृत जीव विज्ञान संस्थान (CSIR-IGIB)—का दौरा कराया गया। इस पहल का उद्देश्य सतत अवसंरचना (स्टील स्लैग रोड तकनीक आदि), जीनोमिक्स और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत के किफायती व स्वदेशी समाधानों को विकासशील देशों में हस्तांतरित करना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को मजबूत बनाना है।
| पहल / क्षेत्र | नोडल एजेंसी / विभाग | प्रमुख लक्ष्य / आंकड़ा |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) | ₹6,003 करोड़ बजट; 1,000 किमी QKD प्रदर्शित |
| जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) | जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) | $195B+ वर्तमान; 2030 तक $300B का लक्ष्य |
| अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र | IN-SPACe / अंतरिक्ष विभाग | 400+ स्टार्टअप्स; 2030 तक $40B का बाजार |
| वैश्विक विज्ञान सहयोग | विदेश मंत्रालय (NEST) व CSIR | ग्लोबल साउथ के 29 देशों के साथ टेक साझेदारी |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| राष्ट्रीय क्वांटम मिशन बजट | ₹6,003 करोड़ (2023-24 से 2030-31) |
|---|---|
| प्रदर्शित क्वांटम नेटवर्क दूरी | 1,000 किलोमीटर (QKD आधारित) |
| भारतीय जैव-अर्थव्यवस्था आकार | 195 अरब अमेरिकी डॉलर (लक्ष्य: $300B by 2030) |
| अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप्स | 400 से अधिक |
| उपग्रह निर्माण में स्वचालित FDI सीमा | 74 प्रतिशत तक |
| IN-SPACe का मुख्यालय | भोपाल/अहमदाबाद (मुख्यालय: बोपल, अहमदाबाद) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। 2. भारत ने इसके तहत 1,000 किमी के क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क का सफल प्रदर्शन किया है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Q2 अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के संशोधित नियमों के अनुसार, उपग्रह निर्माण और संचालन में स्वचालित मार्ग से कितने प्रतिशत FDI की अनुमति है?
Q3 क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक की सुरक्षा मुख्य रूप से किस पर आधारित होती है?
Q4 हाल ही में शुरू की गई ‘BioE3’ नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Q5 ग्लोबल साउथ के राजनयिकों के लिए हाल ही में शुरू किए गए ‘टेक फैमिलियराइजेशन प्रोग्राम’ का आयोजन किन दो संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया?







