राष्ट्रीय समसामयिकी: सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण पर फैसला, INS समर्थक कमीशन व स्पेस इकोनॉमी लक्ष्य
धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, नौसेना में 'INS समर्थक' का प्रवेश और 45 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय विजन।
⭐ मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने पर पूर्व जाति के आधार पर बीसी आरक्षण नहीं मिल सकता।
- सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज की।
- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर 'INS समर्थक' को कमीशन किया।
- आईएनएस समर्थक 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित भारतीय नौसेना का पहला मल्टी-पर्पज वेसल है।
- आईएनएस समर्थक का प्राथमिक उद्देश्य अगली पीढ़ी के हथियारों, संवेदकों और मानवरहित प्रणालियों का परीक्षण करना है।
- केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार भारत की स्पेस इकोनॉमी अगले 7-8 वर्षों में $40-45 बिलियन तक पहुंचेगी।
- वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 9 अरब डॉलर की है जो वैश्विक बाजार की करीब 2% हिस्सेदारी रखती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से देश के नीतिगत, न्यायिक और रक्षा क्षेत्रों में 16-17 अक्टूबर 2026 के दौरान महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाक्रम दर्ज किए गए हैं। इनमें धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण की पात्रता पर सर्वोच्च न्यायालय की संविधान-सम्मत व्यवस्था, नौसेना की मारक एवं परीक्षण क्षमता को सशक्त करता पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल 'आईएनएस समर्थक' तथा भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण का रोडमैप शामिल हैं।
1. सुप्रीम कोर्ट: धर्मांतरण के बाद पूर्व जाति के आधार पर पिछड़ा वर्ग (BC) आरक्षण अनुमन्य नहीं
क्या हुआ?
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय को सही ठहराते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म से इस्लाम धर्म अपनाने वाला कोई व्यक्ति केवल अपने धर्मांतरण से पूर्व की सामाजिक पृष्ठभूमि या जातिगत स्थिति के आधार पर अधिसूचित मुस्लिम पिछड़ा वर्ग श्रेणी के आरक्षण का दावा नहीं कर सकता। न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तमिलनाडु सरकार के वर्ष 2024 के एक शासनादेश (Government Order) से उपजा था। इस आदेश में प्रावधान किया गया था कि हिंदू समुदाय के पिछड़ा वर्ग (BC), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBC), विमुक्त जाति या अनुसूचित जाति (SC) से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षित 7 अधिसूचित पिछड़ा वर्ग समूहों (जैसे लब्बई, अंसारी, दक्कनी, राउथार, मरक्कयार आदि) में से किसी एक का जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर आरक्षण ले सकते हैं। मद्रास उच्च न्यायालय ने इस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिस पर अब सर्वोच्च न्यायालय ने अंतिम मुहर लगा दी है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15(4) तथा अनुच्छेद 16(4) सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs) के उत्थान हेतु विशेष उपबंध और आरक्षण की व्यवस्था करता है।
- न्यायिक सिद्धांत: अदालत ने रेखांकित किया कि किसी नए धार्मिक संप्रदाय में प्रवेश मात्र से व्यक्ति उस संप्रदाय के विशिष्ट ऐतिहासिक पिछड़े सामाजिक समूह का सदस्य स्वतः नहीं बन जाता। सामाजिक पिछड़ापन स्वतः स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
- इंदिरा साहनी वाद (1992): इस ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के वैज्ञानिक और अनुभवजन्य (empirical) अध्ययन को अनिवार्य बताया था।
2. भारतीय नौसेना में प्रथम स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल 'INS समर्थक' कमीशन
क्या हुआ?
कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर आयोजित एक औपचारिक समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल (MPV) 'आईएनएस समर्थक' (INS Samarthak) को राष्ट्र सेवा में समर्पित किया। यह जहाज 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोत श्रेणी का हिस्सा है।
जहाज की विशेषताएँ व कार्यप्रणाली
आईएनएस समर्थक 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कलपुर्जों और प्रौद्योगिकियों के साथ निर्मित किया गया है। यह पोत बहुउद्देशीय अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- सतही लक्ष्यों को खींचना (Towing Targets) ताकि मिसाइलों और तोपों के सजीव अभ्यास किए जा सकें।
- भारतीय नौसेना के अगली पीढ़ी के हथियारों, रडार, सोनार और अन्य संवेदकों (sensors) के समुद्री परीक्षण का मंच बनना।
- तटीय सुरक्षा, गश्त, बारूदी सुरंग निरोधक संचालन (mine-countermeasure support) तथा मानवरहित हवाई व समुद्री वाहनों (UAVs/USVs) का सुगम संचालन।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- प्रोजेक्ट सीबर्ड (Project Seabird): कारवार नौसैनिक अड्डा भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित एशिया के सबसे बड़े नौसैनिक अड्डों में से एक है, जिसे प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत विस्तारित किया गया है।
- रणनीतिक महत्व: यह पोत नौसेना के मुख्य युद्धक जहाजों (Destroyers/Frigates) को परीक्षणों से मुक्त कर अग्रिम सामरिक मोर्चों पर तैनात रखने में सहायता करेगा।
3. भारत की स्पेस इकोनॉमी: आगामी 7-8 वर्षों में 40-45 बिलियन डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
क्या हुआ?
नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' के दौरान 'अंतरिक्ष, संप्रभुता और नई अर्थव्यवस्था' गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो वर्तमान में लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर (वैश्विक हिस्सेदारी का लगभग 2%) है, वर्ष 2033 तक बढ़कर 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।
प्रमुख उत्प्रेरक और नीतिगत सुधार
सरकार द्वारा 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने के बाद से स्टार्टअप्स और उद्योगों की भूमिका में तीव्र वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में 200 से अधिक स्पेस-टेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।
| संस्थान / नीति | भूमिका एवं अधिदेश |
|---|---|
| IN-SPACe (अहमदाबाद) | गैर-सरकारी संस्थाओं (NGPEs) को इसरो की सुविधाओं का उपयोग करने और अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने के लिए एकल-खिड़की नोडल एजेंसी। |
| NSIL (बेंगलुरु) | इसरो के तकनीकी अनुसंधानों का व्यावसायिक दोहन, वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण और मिशन निर्माण। |
| FDI नीति सुधार | उपग्रह निर्माण एवं संचालन में स्वचालित मार्ग से 74% तक और प्रक्षेपण वाहनों में 49% तक एफडीआई की अनुमति। |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- आर्थिक लक्ष्य: भारत का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2047 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी को 8-10% तक ले जाना है।
- सतत विकास में अंतरिक्ष तकनीक: जीआईएस मैपिंग, पीएम गतिशक्ति, कृषि मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम न्यूनीकरण में अंतरिक्ष डेटा का बढ़ता उपयोग।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| INS समर्थक का कमीशन स्थल | कारवार नौसैनिक बेस (कर्नाटक) |
|---|---|
| INS समर्थक में स्वदेशी सामग्री | 75% से अधिक |
| सुप्रीम कोर्ट पीठ के न्यायाधीश | न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर |
| संबद्ध संवैधानिक अनुच्छेद | अनुच्छेद 15(4) एवं अनुच्छेद 16(4) |
| वर्तमान भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था मूल्य | लगभग 9 बिलियन डॉलर |
| अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का 2033 लक्ष्य | 40 से 45 बिलियन डॉलर |
| IN-SPACe का मुख्यालय | भोपाल/बोपल, अहमदाबाद (गुजरात) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 हाल ही में कर्नाटक के कारवार में कमीशन किए गए भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल (MPV) का क्या नाम है?
Q2 अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण के बाद पिछड़ा वर्ग आरक्षण पात्रता के संदर्भ में किस उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा?
Q3 ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में घोषित लक्ष्यों के अनुसार भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आगामी 7-8 वर्षों में कितने मूल्य तक पहुंचने का अनुमान है?
Q4 भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति हेतु विशेष प्रावधान करने की शक्ति प्रदान करता है?
Q5 भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को सुगम व विनियमित करने वाली नोडल एजेंसी 'IN-SPACe' का मुख्यालय कहाँ स्थित है?







