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भारतीय संसद: लोकसभा, राज्यसभा और संसदीय समितियाँ — संपूर्ण GK गाइड

भारतीय संसद की संरचना, लोकसभा, राज्यसभा, संसदीय कार्यप्रणाली, वित्तीय समितियाँ (PAC, प्राक्कलन) और महत्वपूर्ण अनुच्छेदों का संपूर्ण व अद्यतन अध्ययन।

⭐ मुख्य बिंदु

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनती है।
  • लोकसभा का उल्लेख अनुच्छेद 81 में है तथा इसके लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।
  • राज्यसभा एक स्थायी सदन है (अनुच्छेद 80) जिसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है और न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।
  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, परंतु वे सदन के सदस्य नहीं होते।
  • दोनों सदनों में गतिरोध होने पर अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाते हैं, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
  • लोक लेखा समिति (PAC) में 22 सदस्य (15 LS + 7 RS) होते हैं और इसका अध्यक्ष विपक्षी दल का सदस्य होता है।
  • प्राक्कलन समिति संसद की सबसे बड़ी स्थायी समिति है, जिसमें सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से होते हैं।

परिचय: भारतीय संसदीय प्रणाली का स्वरूप

भारत ने शासन की वेस्टमिंस्टर संसदीय प्रणाली (Westminster Model) को अपनाया है, जो मूलतः ब्रिटेन की संवैधानिक परंपरा से प्रेरित है। भारतीय संविधान के भाग-5 (अनुच्छेद 79 से 122) में केंद्रीय संसद के गठन, संरचना, विशेषाधिकार तथा विधायी प्रक्रियाओं का विस्तृत उल्लेख है।

संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, भारत संघ के लिए एक संसद होगी, जो राष्ट्रपति तथा दो सदनों — राज्यसभा (राज्यों की परिषद) एवं लोकसभा (जनता का सदन) से मिलकर बनेगी। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि राष्ट्रपति किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते, फिर भी वे संसद के अभिन्न अंग हैं, क्योंकि दोनों सदनों द्वारा पारित कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बन सकता जब तक कि उस पर राष्ट्रपति की सहमति (अनुच्छेद 111) न मिल जाए।

1. लोकसभा (जनता का सदन / House of the People)

लोकसभा संसद का प्रथम व निम्न सदन (Lower House) है, जो सीधे भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व करता है। संविधान का अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना से संबंधित है।

संरचना और संख्या

  • संवैधानिक अधिकतम सीमा: 550 सदस्य (पहले 552 थी; 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों के मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया)।
  • वर्तमान प्रभावी संख्या: 543 सदस्य (सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्रत्यक्ष वयस्क मताधिकार द्वारा निर्वाचित)।

योग्यता एवं कार्यकाल

  • आयु सीमा: उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए (अनुच्छेद 84)।
  • कार्यकाल: प्रथम बैठक की तारीख से सामान्यतः 5 वर्ष (अनुच्छेद 83(2))। इसे प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा समय से पहले भी भंग किया जा सकता है।
  • आपातकाल में विस्तार: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान संसद विधि द्वारा लोकसभा का कार्यकाल एक बार में अधिकतम 1 वर्ष तक बढ़ा सकती है।

पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष)

संविधान के अनुच्छेद 93 के तहत लोकसभा अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष (Speaker) तथा एक उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) चुनती है। लोकसभा अध्यक्ष सदन का संवैधानिक प्रमुख होता है। अध्यक्ष निर्णायक मत (Casting Vote — अनुच्छेद 100) का प्रयोग केवल मत बराबर होने की दशा में करता है। कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा ही किया जाता है (अनुच्छेद 110(3))।

2. राज्यसभा (राज्यों की परिषद / Council of States)

राज्यसभा संसद का द्वितीय व उच्च सदन (Upper House) है, जो भारतीय संघ के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 80 में है।

संरचना और निर्वाचन

  • अधिकतम सदस्य संख्या: 250 सदस्य (238 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से निर्वाचित + 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत)।
  • वर्तमान सदस्य संख्या: 245 सदस्य (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत)।
  • मनोनयन का आधार: साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति (अनुच्छेद 80(3))।
  • निर्वाचन पद्धति: राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों (MLAs) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा।

स्थायी प्रकृति एवं कार्यकाल

राज्यसभा एक स्थायी सदन (Permanent House) है और यह कभी भी भंग नहीं होती (अनुच्छेद 83(1))। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है तथा प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं। न्यूनतम आयु सीमा 30 वर्ष है।

पीठासीन अधिकारी (सभापति एवं उपसभापति)

भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति (Ex-officio Chairman — अनुच्छेद 64 एवं 89) होते हैं। सभापति राज्यसभा के सदस्य नहीं होते। सदन अपने सदस्यों में से एक उपसभापति (Deputy Chairman) चुनता है जो सभापति की अनुपस्थिति में कार्यवाही का संचालन करता है।

3. लोकसभा और राज्यसभा: तुलनात्मक विश्लेषण

प्रमुख बिंदुलोकसभा (निम्न सदन)राज्यसभा (उच्च सदन)
संवैधानिक अनुच्छेदअनुच्छेद 81अनुच्छेद 80
न्यूनतम आयु25 वर्ष30 वर्ष
कार्यकाल5 वर्ष (अस्थायी, भंग हो सकती है)स्थायी सदन (सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष)
चुनाव का प्रकारप्रत्यक्ष (जनता द्वारा वयस्क मताधिकार)अप्रत्यक्ष (विधायकों द्वारा STV प्रणाली)
पीठासीन अधिकारीलोकसभा अध्यक्ष (सदन का सदस्य)उपराष्ट्रपति/पदेन सभापति (सदन का सदस्य नहीं)
धन विधेयक पर शक्तिविधेयक केवल यहीं पेश; अस्वीकार/पारित करने की पूर्ण शक्तिकेवल 14 दिनों तक रोक सकती है; संशोधन केवल अनुशंसित
मंत्रिपरिषद का उत्तरदायित्वमंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से उत्तरदायी (अनुच्छेद 75(3))मंत्रिपरिषद इसके प्रति उत्तरदायी नहीं होती

4. राज्यसभा की विशेष अनन्य शक्तियाँ

यद्यपि वित्तीय मामलों में लोकसभा अत्यंत शक्तिशाली है, परंतु संघीय व्यवस्था के प्रहरी के रूप में राज्यसभा को कुछ विशिष्ट शक्तियाँ प्राप्त हैं:

  • अनुच्छेद 249: यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे, तो संसद राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बना सकती है (मान्यता 1 वर्ष)।
  • अनुच्छेद 312: राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर केंद्र और राज्यों के लिए एक या अधिक नई अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के सृजन का अधिकार संसद को दे सकती है।
  • उपराष्ट्रपति को हटाना (अनुच्छेद 67): उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का संकल्प केवल राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

5. विधायी प्रक्रिया और संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108)

जब किसी साधारण विधेयक या वित्त विधेयक पर दोनों सदनों के बीच 6 महीने से अधिक का गतिरोध उत्पन्न हो जाता है, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाते हैं।

अति महत्वपूर्ण तथ्य: संयुक्त बैठक की अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष करते हैं (अनुच्छेद 118(4))। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा उपाध्यक्ष और उनकी भी अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति अध्यक्षता करते हैं। ध्यान रहे, राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते क्योंकि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते।

अपवाद: धन विधेयक (अनुच्छेद 110) और संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368) पर संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।

6. संसदीय शब्दावली एवं कार्यसंचालन

  • कोरम या गणपूर्ति (अनुच्छेद 100(3)): सदन की बैठक आयोजित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम सदस्य संख्या, जो कुल सदस्य संख्या का 1/10 (10%) होती है।
  • प्रश्नकाल (Question Hour): संसद की बैठक का पहला घंटा (प्रातः 11:00 से 12:00)। इसमें तीन प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं — तारांकित (Starry - मौखिक उत्तर, पूरक प्रश्न अनुमत), अतारांकित (लिखित उत्तर, पूरक प्रश्न नहीं) और अल्प सूचना प्रश्न।
  • शून्यकाल (Zero Hour): प्रश्नकाल के ठीक बाद (दोपहर 12:00 से 1:00) का समय। यह 1962 में शुरू हुई पूर्णतः भारतीय नवाचार परंपरा है, जिसका नियमों में कोई लिखित उल्लेख नहीं है। इसमें बिना पूर्व सूचना के अविलंबनीय लोक महत्व के मामले उठाए जाते हैं।
  • अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion): केवल लोकसभा में नियम 198 के तहत लाया जा सकता है। इसे पेश करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इसके पारित होने पर सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है।

7. संसदीय समितियाँ (Parliamentary Committees)

संसद का विधायी कार्य अत्यंत जटिल और विस्तृत होता है, इसलिए विधेयकों, बजट और प्रशासनिक नीतियों की गहन जाँच हेतु समितियाँ बनाई जाती हैं। समितियाँ दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियाँ (Standing Committees) और तदर्थ समितियाँ (Ad-hoc Committees)।

प्रमुख वित्तीय समितियाँ

समिति का नामगठन वर्ष एवं आधारकुल सदस्य संख्याअध्यक्ष की नियुक्ति / परंपरामुख्य कार्य
लोक लेखा समिति (PAC)1921 (भारत सरकार अधिनियम 1919)22 (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)1967 से परंपरा के अनुसार विपक्षी दल का सदस्यCAG की रिपोर्टों की जाँच करना; इसे ‘संसद की तीसरी आँख’ और ‘प्राक्कलन समिति की जुड़वां बहन’ कहा जाता है।
प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)1950 (जॉन मथाई की सिफारिश पर)30 (केवल लोकसभा से; राज्यसभा का शून्य प्रतिनिधित्व)सत्तारूढ़ दल से लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्तबजट अनुमानों की जाँच और सरकारी खर्च में मितव्ययिता (Economy) सुझाना। इसे ‘सतत मितव्ययिता समिति’ भी कहते हैं।
सार्वजनिक उपक्रम समिति (CoPU)1964 (कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश)22 (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)लोकसभा सदस्यों में से अध्यक्ष नियुक्तसरकारी कंपनियों (PSUs) के वित्तीय लेखा-जोखा व कैग रिपोर्ट की जाँच।
नियम: किसी भी वित्तीय समिति में कोई मंत्री सदस्य नहीं बन सकता। यदि कोई सदस्य मंत्री बन जाता है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इनका कार्यकाल 1 वर्ष का होता है और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा होता है।

विभागीय स्थायी समितियाँ (DRSCs)

वर्तमान में कुल 24 विभागीय स्थायी समितियाँ कार्यरत हैं (16 लोकसभा के अधीन और 8 राज्यसभा के अधीन)। प्रत्येक समिति में 31 सदस्य (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा) होते हैं। इनका मुख्य कार्य संबंधित मंत्रालयों के बजट अनुदान की माँगों और विधेयकों की संवीक्षा करना है।

याद रखने की ट्रिक (Mnemonics)

  • सरल (SARAL) ट्रिक: संसद के मूल अनुच्छेदों के क्रम को याद रखने के लिए ‘सरल’ याद रखें — स = संसद (अनुच्छेद 79), र = राज्यसभा (अनुच्छेद 80), ल = लोकसभा (अनुच्छेद 81)।
  • वित्तीय समितियों की सदस्य संख्या: PAC = 22 (15+7), CoPU = 22 (15+7), परंतु प्राक्कलन (Estimates) सबसे बड़ी समिति है = पूरे 30 सदस्य (केवल लोकसभा से, राज्यसभा शून्य)।
  • संवैधानिक न्यूनतम आयु सीढ़ी: पंचायत चुनाव = 21 वर्ष → लोकसभा/विधानसभा = 25 वर्ष → राज्यसभा/विधान परिषद = 30 वर्ष → राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति/राज्यपाल = 35 वर्ष।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है (PYQ Pattern Analysis)

  1. अनुच्छेद मिलान: UPSC एवं State PCS में सीधे तौर पर अनुच्छेद 79 (संसद), 80 (राज्यसभा), 81 (लोकसभा), 108 (संयुक्त बैठक), 110 (धन विधेयक) और 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण/बजट) का मिलान पूछा जाता है।
  2. राज्यसभा की अनन्य शक्तियाँ: BPSC, UPPSC और UPSC प्रीलिम्स में बार-बार पूछा गया है कि किस अनुच्छेद के तहत राज्यसभा राज्य सूची पर संसद को विधि बनाने का अधिकार देती है (उत्तर: अनुच्छेद 249) तथा नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन (अनुच्छेद 312)।
  3. समितियों की संरचना: SSC और रेलवे में सबसे प्रिय प्रश्न: प्राक्कलन समिति में राज्यसभा के कितने सदस्य होते हैं? (उत्तर: शून्य) और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है? (उत्तर: लोकसभा अध्यक्ष)।

हालिया बदलाव और महत्वपूर्ण तथ्य

  • 104वाँ संविधान संशोधन (2019): लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के मनोनयन को समाप्त कर दिया गया, जिससे लोकसभा की प्रभावी निर्वाचित संख्या 543 हो गई।
  • 106वाँ संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023): लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का ऐतिहासिक संवैधानिक प्रावधान किया गया।
  • नया संसद भवन: सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत निर्मित नए संसद भवन में लोकसभा कक्ष की क्षमता 888 सीटें (राष्ट्रीय पक्षी मयूर की थीम) और राज्यसभा कक्ष की क्षमता 384 सीटें (राष्ट्रीय पुष्प कमल की थीम) है।
  • नेता प्रतिपक्ष (LoP): किसी दल को आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष का दर्जा पाने हेतु सदन की कुल संख्या का कम से कम 10% (लोकसभा में 55 सीटें) होना अनिवार्य है (18वीं लोकसभा में राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं)।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

संसद का गठन (अनुच्छेद)अनुच्छेद 79
लोकसभा की वर्तमान निर्वाचित सीटें543
राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या245 (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत)
सदन की गणपूर्ति (कोरम)कुल संख्या का 1/10 (10%)
सबसे बड़ी संसदीय समितिप्राक्कलन समिति (30 सदस्य, सभी लोकसभा)
लोक लेखा समिति (PAC) के सदस्य22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)
संयुक्त बैठक का प्रावधानअनुच्छेद 108 (अध्यक्षता: लोकसभा अध्यक्ष)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) की अध्यक्षता निम्नलिखित में से कौन करता है?

Q2 प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?

Q3 भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यसभा को राज्य सूची के विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बनाने हेतु संसद को अधिकृत करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है?

Q4 लोक लेखा समिति (PAC) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य असत्य है?

Q5 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा संसद में कौन सा प्रमुख परिवर्तन किया गया?

स्रोत