विज्ञान एवं तकनीक

क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल परीक्षण और S&T क्लस्टर्स का वैश्विक विस्तार

डीआरडीओ ने स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल परीक्षण कर सेना में समावेशन का मार्ग प्रशस्त किया, वहीं प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के S&T क्लस्टर्स ने आरएससी के साथ रणनीतिक समझौता किया।

⭐ मुख्य बिंदु

  • डीआरडीओ ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल परीक्षण किया।
  • यह परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण का हिस्सा था, जिससे सशस्त्र बलों में इसका समावेशन तय हो गया है।
  • ‘प्रलय’ 150 से 500 किमी दूरी तक 500 से 1,000 किलोग्राम का पारंपरिक पेलोड ले जाने में सक्षम सतह-से-सतह मिसाइल है।
  • यह मिसाइल ठोस प्रणोदक आधारित है और उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्वासी-बैलिस्टिक क्षमता रखती है।
  • ‘प्रलय’ का मुख्य विकास रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद और उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है।
  • प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के S&T क्लस्टर्स ने रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (RSC) के साथ रणनीतिक समझौता किया।
  • भारत के S&T क्लस्टर्स की स्थापना 2020 में PM-STIAC की सिफारिशों के तहत क्षेत्रीय नवाचार को बढ़ावा देने हेतु हुई थी।
  • यह अंतरराष्ट्रीय साझेदारी रासायनिक विज्ञान, हरित ऊर्जा और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध को गति देगी।

भारत के रक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान परिदृश्य में दो अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी सामरिक सतह-से-सतह क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ (Pralay) का ओडिशा तट पर सफल उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण संपन्न किया। वहीं दूसरी ओर, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) कार्यालय के अंतर्गत संचालित साइंस एंड टेक्नोलॉजी (S&T) क्लस्टर्स ने वैश्विक स्तर पर रासायनिक विज्ञान एवं नवाचार को गति देने के लिए प्रतिष्ठित ‘रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री’ (RSC) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

डीआरडीओ की सामरिक छलांग: ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण

क्या हुआ?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह-से-सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक (Quasi-ballistic) मिसाइल प्रलय का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण (User Evaluation Trials) के हिस्से के रूप में पूर्वाह्न 11:10 बजे आयोजित किया गया। एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर द्वारा तैनात विभिन्न रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री उपकरणों ने पुष्टि की कि मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सटीकता से पूरा किया है। इस परीक्षण के साथ ही भारतीय सेना में प्रलय मिसाइल के औपचारिक समावेशन (Induction) का रास्ता साफ हो गया है।

‘प्रलय’ मिसाइल की मुख्य तकनीकी विशेषताएं

  • प्रणोदन एवं प्रकार: यह ठोस प्रणोदक (Solid Propellant) रॉकेट मोटर द्वारा संचालित एक लघु-दूरी की सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है।
  • मारक क्षमता एवं पेलोड: प्रलय की स्ट्राइक रेंज 150 से 500 किलोमीटर है। यह 500 किलोग्राम से लेकर 1,000 किलोग्राम तक के विभिन्न प्रकार के पारंपरिक (Conventional) वारहेड ले जाने में सक्षम है।
  • क्वासी-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र: पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें एक निश्चित परवलयाकार (Parabolic) मार्ग पर उड़ती हैं, जिनका मार्ग दुश्मन के रडार आसानी से भांप लेते हैं। इसके विपरीत, प्रलय एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जो वायुमंडल के भीतर ही उड़ान भरती है और मध्य-मार्ग तथा अंतिम चरण (Terminal Phase) में अपनी दिशा बदलने (Manoeuvring) में सक्षम है।
  • अवरोधन से बचाव: अंतिम चरण में अत्यधिक गति (Mach 5 से अधिक) और दिशा परिवर्तन क्षमता के कारण दुश्मन के उन्नत वायु रक्षा तंत्र (जैसे S-400 या HQ-9) के लिए इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।
  • विकास एवं उत्पादन: इसका विकास डीआरडीओ की प्रमुख हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के सहयोग से किया गया है, जबकि इसका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जा रहा है।

सामरिक महत्व

प्रलय मिसाइल भारतीय सेना की प्रस्तावित ‘रॉकेट फोर्स’ (Rocket Force) की मुख्य आधारशिला बनेगी। चूंकि भारत की परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज़’ (No First Use) की है, इसलिए पारंपरिक हथियारों से लैस सटीक सामरिक मिसाइलें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर सामरिक संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। यह मिसाइल वैश्विक स्तर पर रूस की ‘इस्कंदर’ (Iskander) और चीन की ‘डोंगफेंग-12’ (DF-12) के समकक्ष मानी जाती है।

रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री और भारत के S&T क्लस्टर्स का गठबंधन

क्या हुआ?

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (Principal Scientific Adviser - PSA) कार्यालय के तहत संचालित साइंस एंड टेक्नोलॉजी (S&T) क्लस्टर्स और यूके स्थित प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (RSC) के भारतीय कार्यालय ने एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में स्थित दिल्ली साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर (DRIIV - Delhi Research Implementation and Innovation) द्वारा किया गया।

पृष्ठभूमि: भारत की S&T क्लस्टर्स पहल

साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर्स की शुरुआत वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य एक ही भौगोलिक क्षेत्र में स्थित विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, स्टार्ट-अप्स, उद्योगों और स्थानीय सरकारों को एक मंच पर लाना है, ताकि अनुसंधान को पृथक दायरों (Silos) से बाहर निकालकर स्थानीय और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप वास्तविक उत्पादों में बदला जा सके। वर्तमान में देश में 8 प्रमुख S&T क्लस्टर्स (दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, जोधपुर आदि) कार्यरत हैं।

इस साझेदारी का प्रभाव

  • अनुसंधान का व्यावसायीकरण: भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रासायनिक विज्ञान के नवाचारों, सस्टेनेबल ग्रीन केमिस्ट्री और सामग्री विज्ञान (Materials Science) से जोड़ा जाएगा।
  • कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण: भारतीय विश्वविद्यालयों और उद्योग के युवा शोधकर्ताओं के लिए कार्यशालाएं, ज्ञान विनिमय कार्यक्रम और उन्नत अनुसंधान सुविधाएं सुलभ होंगी।
  • पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान: यह साझेदारी स्वच्छ ऊर्जा, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, जल शोधन और हरित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में जमीनी स्तर के समाधान विकसित करने पर केंद्रित होगी।

परीक्षा की दृष्टि से तुलनात्मक विश्लेषण

पैमाना‘प्रलय’ मिसाइल (Pralay)S&T क्लस्टर्स पहल (PSA)
प्रकृतिसामरिक रक्षा तकनीक (Defence R&D)अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem)
नोडल एजेंसीडीआरडीओ (DRDO) एवं रक्षा मंत्रालयप्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (Office of PSA)
प्राथमिक उद्देश्यपारंपरिक सटीक स्ट्राइक निवारक क्षमताअकादमिक-उद्योग साझेदारी और अनुसंधान का अनुप्रयोग
प्रमुख विशेषताक्वासी-बैलिस्टिक क्षमता, 150-500 किमी रेंजस्थानीय चुनौतियों हेतु 8 क्षेत्रीय हब, बहु-विषयक शोध

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मिसाइल का नामप्रलय (Pralay)
मिसाइल का प्रकारठोस-ईंधन चालित क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल
मारक क्षमता150 से 500 किलोमीटर
मुख्य विकास प्रयोगशालारिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद
S&T क्लस्टर्स की शुरुआतवर्ष 2020 (PM-STIAC की सिफारिश)
सक्रिय S&T क्लस्टर्स8 प्रमुख क्लस्टर्स (दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु आदि)
समझौता साझेदार संस्थारॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (RSC)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 डीआरडीओ द्वारा हाल ही में सफल परीक्षण की गई सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल ‘प्रलय’ की मुख्य विशेषता क्या है?

Q2 स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ की प्रमुख डिज़ाइन एवं विकासकर्ता प्रयोगशाला कौन-सी है?

Q3 पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में क्वासी-बैलिस्टिक (Quasi-ballistic) मिसाइल की क्या विशेषता होती है?

Q4 भारत में 'साइंस एंड टेक्नोलॉजी (S&T) क्लस्टर्स' पहल की स्थापना किस संस्था की अनुशंसा पर की गई थी?

Q5 हाल ही में रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (RSC) के साथ समझौता करने वाले भारत के S&T क्लस्टर्स का मुख्य उद्देश्य क्या है?

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