इसरो का हरित व इलेक्ट्रिक प्रणोदन रोडमैप और भारत-जेन का संप्रभु AI मॉडल
इसरो ने उपग्रहों हेतु इलेक्ट्रिक प्लाज्मा थ्रस्टर व हरित प्रणोदक इसरोसीन की प्रगति साझा की, वहीं भारत-जेन मिशन ने देश के संप्रभु बहुभाषी एआई पारिस्थितिकी तंत्र को गति दी।
⭐ मुख्य बिंदु
- इसरो ने 300 मिलीन्यूटन क्षमता वाले स्वदेशी स्टेशनरी प्लाज्मा थ्रस्टर (SPT) का 1,000 घंटे का लाइफ टेस्ट पूरा किया।
- इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली का विशिष्ट आवेग पारंपरिक रासायनिक प्रणोदन से कम से कम 6 गुना अधिक होता है।
- इस तकनीक का इन-ऑर्बिट वैलिडेशन आगामी टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेशन सैटेलाइट (TDS-01) पर किया जाएगा।
- इसरो सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों के लिए 'इसरोसीन' (रॉकेट-ग्रेड केरोसिन) आधारित हरित ईंधन विकसित कर रहा है।
- भारत-जेन (BharatGen) विश्व की पहली सरकारी वित्तपोषित बहु-माध्यमी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) पहल है।
- यह परियोजना IIT बॉम्बे के नेतृत्व में NM-ICPS मिशन के तहत संचालित की जा रही है।
- भारत-जेन संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में स्थानीय संदर्भ आधारित एआई समाधान प्रदान करेगा।
भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिदृश्य में रणनीतिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले दो बड़े तकनीकी विकास सामने आए हैं। एक ओर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भविष्य के उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए उच्च-दक्षता वाले इलेक्ट्रिक प्रणोदन (Electric Propulsion) और हरित ईंधन (Green Propellants) का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया है, वहीं दूसरी ओर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के मार्गदर्शन में संचालित ‘भारत-जेन’ (BharatGen) पहल के माध्यम से भारत की संप्रभु, बहुभाषी और बहु-माध्यमी जेनेरिक एआई क्षमताओं को नई दिशा मिली है।
1. इसरो की नई पीढ़ी की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियाँ: इलेक्ट्रिक व हरित प्रणोदन
क्या है नवीनतम विकास?
इसरो द्वारा जारी तकनीकी अद्यतन के अनुसार, भारत अपने आगामी उपग्रहों की कक्षा प्रबंधन और डीप-स्पेस मिशनों के लिए रासायनिक प्रणोदन पर निर्भरता घटाकर इलेक्ट्रिक व हरित प्रणोदन तकनीकों को अपना रहा है। इस दिशा में इसरो ने अपने स्वदेशी 300 मिलीन्यूटन (mN) स्टेशनरी प्लाज्मा थ्रस्टर (Stationary Plasma Thruster - SPT) का 1,000 घंटे का सफल लाइफ-साइकिल परीक्षण पूरा किया है, जिसे आगामी ‘टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेशन सैटेलाइट’ (TDS-01) पर अंतरिक्ष में प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ और उनकी विशेषताएँ:
- स्टेशनरी प्लाज्मा थ्रस्टर (SPT): यह जेनन (Xenon) गैस के आयनीकरण द्वारा थ्रस्ट उत्पन्न करता है। इसका विशिष्ट आवेग (Specific Impulse) पारंपरिक रासायनिक इंजनों की तुलना में कम से कम 6 गुना अधिक होता है। इससे उपग्रहों में ईंधन का भार काफी घट जाता है और अधिक वैज्ञानिक पेलोड ले जाना संभव होता है।
- हरित प्रणोदक 'इसरोसीन' (ISROSENE): सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों में विषाक्त प्रणोदकों (जैसे हाइड्राजीन) के विकल्प के रूप में इसरो रॉकेट-ग्रेड केरोसिन ‘इसरोसीन’ और लिक्विड ऑक्सीजन के संयोजन का विकास कर रहा है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र (जैसे बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस) द्वारा 1-न्यूटन श्रेणी का गैर-विषाक्त मोनोप्रोपेलेंट थ्रस्टर भी तैयार किया गया है।
- नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV): भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के निर्माण हेतु स्वीकृत ₹8,240 करोड़ की लागत वाला NGLV निम्न-भू कक्षा (LEO) में 30 टन (डिस्पोजेबल) और 14 टन (पुन: प्रयोज्य) तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा।
पृष्ठभूमि व सामरिक महत्त्व
पारंपरिक उपग्रहों के कुल भार का लगभग 50-60% हिस्सा केवल ऑन-बोर्ड रासायनिक ईंधन होता है। इलेक्ट्रिक थ्रस्टर के उपयोग से उपग्रहों का परिचालन जीवनकाल 15 वर्ष से अधिक बढ़ सकता है तथा प्रक्षेपण लागत में भारी कमी आ सकती है। यह भारत को वैश्विक वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
2. ‘भारत-जेन’ (BharatGen): संप्रभु एवं बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचा
क्या है यह पहल?
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा समर्थित भारत-जेन (BharatGen) विश्व की पहली सरकारी वित्तपोषित बहु-माध्यमी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (Multimodal LLM) परियोजना है। इसका क्रियान्वयन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के नेतृत्व वाले शैक्षणिक संघ (Consortium) द्वारा किया जा रहा है।
मुख्य स्तंभ और सामरिक उद्देश्य:
- 22 अनुसूचित भारतीय भाषाएं: भारत-जेन भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए 22 आधिकारिक भाषाओं में पाठ (Text), वाक् (Speech) और कंप्यूटर विज़न (Vision) को संसाधित करने में सक्षम मॉडल तैयार कर रहा है।
- परम-2 (Param2) रीजनिंग मॉडल: भारत-केंद्रित ज्ञान और सांस्कृतिक संदर्भों पर प्रशिक्षित 17 बिलियन पैरामीटर वाला स्वदेशी एआई रीजनिंग मॉडल विकसित किया गया है, जो डेटा की न्यूनतम उपलब्धता वाले स्थानीय भाषाई क्षेत्रों में भी कार्यकुशल है।
- डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty): ‘भारत डेटा सागर’ के माध्यम से देश का डेटा देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रखकर विदेशी एआई प्लेटफॉर्मों पर निर्भरता समाप्त की जा रही है।
- सार्वजनिक सेवा वितरण: यह प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और न्याय वितरण में स्थानीय भाषा-आधारित एआई समाधान (जैसे वॉइस-बेस्ड टेलीमेडिसिन) उपलब्ध कराएगा।
नोडल मिशन: NM-ICPS
भारत-जेन का विकास राष्ट्रीय अंतःविषय साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन (National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems - NM-ICPS) के तहत आईआईटी बॉम्बे के टीआईएच फाउंडेशन (TIH Foundation for IoT and IoE) द्वारा किया जा रहा है।
प्रतियोगी परीक्षा तुलनात्मक सारांश
| पैमाना | इसरो इलेक्ट्रिक/हरित प्रणोदन | भारत-जेन (BharatGen) AI पहल |
|---|---|---|
| नोडल निकाय | इसरो / अंतरिक्ष विभाग | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) / IIT बॉम्बे |
| केंद्रीय नवाचार | 300 mN स्टेशनरी प्लाज्मा थ्रस्टर और इसरोसीन | 22 भाषाओं हेतु स्वदेशी बहु-माध्यमी LLM (Param2) |
| प्रायोगिक मिशन | प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह (TDS-01) | NM-ICPS मिशन के तहत जन-सेवा अनुप्रयोग |
| रणनीतिक प्रभाव | उपग्रह भार में कमी, स्पेस सस्टेनेबिलिटी | डिजिटल समावेशन, डेटा संप्रभुता, स्थानीय भाषा AI |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| SPT थ्रस्ट क्षमता | 300 मिलीन्यूटन (विद्युत शक्ति 5.4 किलोवाट) |
|---|---|
| इलेक्ट्रिक थ्रस्टर प्रदर्शन उपग्रह | TDS-01 (Technology Demonstration Satellite) |
| स्वदेशी रॉकेट-ग्रेड केरोसिन | इसरोसीन (ISROSENE) |
| भारत-जेन की कार्यान्वयन संस्था | TIH फाउंडेशन (IIT बॉम्बे) |
| भारत-जेन का मूल राष्ट्रीय मिशन | NM-ICPS (मंजूरी वर्ष 2018) |
| लक्षित भारतीय भाषाएँ | 22 आधिकारिक अनुसूचित भाषाएँ |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 हाल ही में चर्चित 'स्टेशनरी प्लाज्मा थ्रस्टर' (SPT) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक प्रकार की इलेक्ट्रिक प्रणोदन तकनीक है जो प्रणोदक के रूप में मुख्य रूप से जेनन गैस का उपयोग करती है। 2. इसका विशिष्ट आवेग पारंपरिक रासायनिक प्रणोदन की तुलना में काफी कम होता है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Q2 इसरो द्वारा विकसित किया जा रहा 'इसरोसीन' (ISROSENE) क्या है?
Q3 विश्व की पहली सरकारी वित्तपोषित बहुभाषी व बहु-माध्यमी एआई पहल 'भारत-जेन' (BharatGen) का कार्यान्वयन किस संस्थान के नेतृत्व में किया जा रहा है?
Q4 इसरो की नई इलेक्ट्रिक प्रणोदन तकनीक का अंतरिक्ष में प्रदर्शन किस उपग्रह मिशन द्वारा किया जाएगा?
Q5 'भारत-जेन' पहल किस प्रमुख राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत शुरू की गई है?







