अर्थव्यवस्था

36वां राज्य वित्त सचिव सम्मेलन और $12.7 अरब FCNR(B) प्रवाह: राजकोषीय व बैंकिंग समीक्षा

RBI ने 36वें राज्य वित्त सचिव सम्मेलन में राजकोषीय संधारणीयता और विवेकपूर्ण उधारी पर बल दिया, जबकि बैंकों ने जुटाए $12.7 अरब के FCNR(B) डॉलर फंड।

⭐ मुख्य बिंदु

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुंबई में राज्य वित्त सचिवों के 36वें सम्मेलन का आयोजन किया, जिसका मुख्य विषय राजकोषीय संधारणीयता था।
  • आरबीआई ने राज्यों को पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता सुधारने, नकदी प्रबंधन मजबूत करने और विवेकपूर्ण उधारी अपनाने की सलाह दी।
  • समेकित ऋण शोधन निधि (CSF) और गारंटी मोचन निधि (GRF) में अधिशेष बढ़ाकर राज्यों को भविष्य के वित्तीय जोखिम कम करने का निर्देश दिया गया।
  • आरबीआई की स्वैप सहायता से भारतीय बैंकों ने FCNR(B) सावधि जमा के तहत रिकॉर्ड 12.7 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए।
  • क्रेडिट-टू-जीडीपी अनुपात के विस्तार को भारत के दीर्घकालिक विकास और वित्तीय समावेशन के लिए आवश्यक माना गया।
  • आरबीआई के शोध अध्ययन में पाया गया कि सैटेलाइट नाइट-टाइम लाइट और गूगल ट्रेंड्स से राज्य विकास अनुमानों की त्रुटि 62% तक घट सकती है।
  • संविधान के अनुच्छेद 293(3) के अनुसार पूर्व बकाया होने पर राज्यों को बाजार उधारी के लिए केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य होती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता, स्थायित्व और राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में हालिया घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुंबई में राज्य वित्त सचिवों का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया। वहीं दूसरी ओर, बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी FCNR(B) जमाओं में तेज़ वृद्धि और आर्थिक संकेतकों के आकलन के लिए आधुनिक उपग्रह डेटा के उपयोग पर नए अध्ययन सामने आए हैं।

1. 36वां राज्य वित्त सचिव सम्मेलन: राज्यों की राजकोषीय संधारणीयता पर ज़ोर

क्या हुआ?

भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुंबई में राज्य वित्त सचिवों के 36वें सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय था: ‘व्यय की गुणवत्ता, प्रभावी नकदी और विवेकपूर्ण ऋण प्रबंधन की राज्यों की राजकोषीय संधारणीयता में भूमिका’ (Role of Quality of Expenditure, Effective Cash and Prudent Debt Management in Enhancing States’ Fiscal Sustainability)। सम्मेलन में 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त सचिवों के साथ-साथ केंद्रीय वित्त मंत्रालय, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) तथा महालेखा नियंत्रक (CGA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया!

सम्मेलन में आरबीआई गवर्नर ने राज्यों को सलाह दी कि वे अपने राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) को नियंत्रित करते हुए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की गुणवत्ता में सुधार करें। साथ ही, भविष्य की देनदारियों के सुरक्षित प्रबंधन के लिए समेकित ऋण शोधन निधि (Consolidated Sinking Fund - CSF) और गारंटी मोचन निधि (Guarantee Redemption Fund - GRF) में अधिक अधिशेष रखने का आह्वान किया गया!

पृष्ठभूमि

राज्यों का बाजार उधारी (State Development Loans - SDL) पर बढ़ता निर्भरता स्तर राजकोषीय घाटे को प्रभावित करता है। कोविड महामारी के बाद राज्यों के ऋण-से-जीएसडीपी (Debt-to-GSDP) अनुपात में वृद्धि देखी गई है। ऐसे में राज्यों द्वारा अत्यधिक अनियंत्रित उधारी और गैर-उत्पादक सब्सिडी व्यय भविष्य की राजकोषीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 293): संविधान के अनुच्छेद 293 के तहत राज्य केवल भारत के भीतर ही उधार ले सकते हैं। यदि राज्य पर केंद्र का कोई ऋण बकाया है, तो उसे नई उधारी लेने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व सहमति लेना अनिवार्य है (अनुच्छेद 293(3))।
  • अर्थोपाय अग्रिम (Ways and Means Advances - WMA): यह आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 17(5) के तहत केंद्र व राज्यों को राजस्व प्राप्तियों और खर्चों के बीच अस्थायी असंतुलन को पाटने के लिए दी जाने वाली अल्पकालिक ऋण सुविधा है (अधिकतम 90 दिन)।
  • सीएसएफ व जीआरएफ तंत्र: समेकित ऋण शोधन निधि (CSF) राज्यों को बाजार ऋण चुकाने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है, जबकि गारंटी मोचन निधि (GRF) राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों को दी गई गारंटियों के संभावित जोखिमों से निपटने के लिए बनाई गई है।
उपकरणप्रबंधनकर्ताउद्देश्य
अर्थोपाय अग्रिम (WMA)भारतीय रिज़र्व बैंकप्राप्तियों और भुगतानों के बीच अल्पकालिक नकदी अंतराल भरना
समेकित ऋण शोधन निधि (CSF)भारतीय रिज़र्व बैंकराज्यों के बाजार ऋणों के पुनर्भुगतान हेतु आरक्षित बफर
गारंटी मोचन निधि (GRF)भारतीय रिज़र्व बैंकराज्य द्वारा दी गई गारंटी के डिफ़ॉल्ट जोखिम का प्रबंधन

2. बैंकिंग क्षेत्र में $12.7 अरब का FCNR(B) प्रवाह और ऋण-जीडीपी मंथन

क्या हुआ?

मुंबई में आयोजित बैंकिंग व वित्तीय शिखर सम्मेलन (BFSI Summit 2026) के दौरान यह तथ्य रेखांकित हुआ कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी FCNR(B) सावधि जमाओं के ज़रिये लगभग 12.7 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी विदेशी पूंजी जुटाई है। इस प्रवाह में आरबीआई की डॉलर-रुपया स्वैप सहायता ने प्रमुख भूमिका निभाई। इसी मंच पर शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने भारत के ‘क्रेडिट-टू-जीडीपी’ (Credit-to-GDP) अनुपात पर चर्चा करते हुए बताया कि अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण और वित्तीय पहुंच बढ़ने से ऋण उठाव में निरंतर वृद्धि होगी!

पृष्ठभूमि

FCNR(B) खाते अनिवासी भारतीयों (NRIs) को पाउंड, अमेरिकी डॉलर, यूरो जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राओं में भारत के बैंकों में सावधि जमा रखने की अनुमति देते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जमाकर्ता पर विनिमय दर (Currency Risk) का जोखिम नहीं होता। वैश्विक बाजार में ब्याज दरों की अस्थिरता और बाह्य दबावों के समय यह पूंजी विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देती है, हालांकि विश्लेषकों ने मध्यम अवधि में इसके पुनर्भुगतान दायित्वों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी भी दी है!

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु

  • क्रेडिट-टू-जीडीपी अनुपात: यह संकेतक देश के कुल बैंक ऋण और उसके सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात होता है। भारत में यह अनुपात वैश्विक मानकों और विकसित देशों की तुलना में कम (लगभग 55-60%) है, जिसका अर्थ है कि देश में वित्तीय गहराव (Financial Deepening) के विस्तार की पर्याप्त गुंजाइश है।
  • अनिवासी खाते: भारत में प्रमुख तीन अनिवासी खाते होते हैं— NRE (Non-Resident External), NRO (Non-Resident Ordinary), और FCNR(B)। NRE और NRO खाते रुपये में संधारित होते हैं, जबकि FCNR(B) विदेशी मुद्रा में ही रखा जाता है।

3. आर्थिक ‘नाउकास्टिंग’: सैटेलाइट लाइट और गूगल सर्च डेटा का नवाचार

क्या हुआ?

आरबीआई के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में राज्य-स्तरीय आर्थिक विकास के तात्कालिक आकलन (Nowcasting) के लिए अभिनव तकनीकों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, उपग्रहों द्वारा खींची गई ‘नाइट-टाइम लाइट’ (रात्रि प्रकाश की तीव्रता) और गूगल ट्रेंड्स सर्च डेटा को मिलाकर विश्लेषण करने से राज्यों के त्रैमासिक विकास अनुमानों में त्रुटियों को 62 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है!

नीतिगत व परीक्षा प्रासंगिकता

पारंपरिक आर्थिक आँकड़े (जैसे जीएसडीपी और औद्योगिक उत्पादन) जारी होने में कई महीनों का समय लगता है, जिससे समयबद्ध नीतिगत फैसले लेना कठिन हो जाता है। ‘नाउकास्टिंग’ का अर्थ है बहुत ही हालिया अतीत या वर्तमान अवधि के आँकड़ों का वास्तविक समय में अनुमान लगाना। सैटेलाइट नाइट-टाइम डेटा औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियों और बिजली उपभोग का सीधा पैमाना बनता है, जो नीति निर्माताओं को अधिक सटीक राजकोषीय योजना बनाने में सहायता करता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

36वें वित्त सचिव सम्मेलन का विषयव्यय की गुणवत्ता, प्रभावी नकदी और विवेकपूर्ण ऋण प्रबंधन
FCNR(B) के तहत जुटाई गई विदेशी पूंजी12.7 अरब अमेरिकी डॉलर
समेकित ऋण शोधन निधि (CSF) का संचालकभारतीय रिज़र्व बैंक (स्थापना: वर्ष 1999)
राज्यों द्वारा उधारी का संवैधानिक अनुच्छेदअनुच्छेद 293 (भाग XII)
अर्थोपाय अग्रिम (WMA) का कानूनी आधारआरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 17(5)
नाउकास्टिंग अध्ययन में त्रुटि कमी62% (नाइट-टाइम लाइट व सर्च डेटा संयोजन द्वारा)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्य सरकारों द्वारा उधार लेने की शक्तियों और शर्तों को विनियमित किया जाता है?

Q2 हाल ही में आयोजित 36वें राज्य वित्त सचिव सम्मेलन का मुख्य फोकस किस विषय पर था?

Q3 आरबीआई द्वारा प्रबंधित ‘समेकित ऋण शोधन निधि’ (Consolidated Sinking Fund - CSF) का प्राथमिक कार्य क्या है?

Q4 विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक [FCNR(B)] खातों की मुख्य विशेषता क्या है?

Q5 आरबीआई के हालिया अध्ययन के अनुसार, राज्य-स्तरीय आर्थिक गतिविधियों की ‘नाउकास्टिंग’ (Nowcasting) में किन संकेतकों के उपयोग से त्रुटि 62% तक कम हुई?

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