सीसीयूएस तकनीक से उद्योगों का डीकार्बोनाइजेशन और स्वदेशी जीन संश्लेषण पर भारत का जोर
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हेतु सीसीयूएस तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी जीन संश्लेषण पर केंद्रित नई रूपरेखा प्रस्तुत की है।
⭐ मुख्य बिंदु
- भारत सरकार ने 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य को गति देने के लिए ₹20,000 करोड़ के बजटीय समर्थन के साथ CCUS तकनीक के विस्तार पर बल दिया है।
- CCUS योजना मुख्य रूप से इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी, रसायन और ताप विद्युत जैसे भारी उद्योगों को लक्षित करती है।
- IIT बॉम्बे और JNCASR बेंगलुरु में स्थापित दो राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र CCUS अनुसंधान का नेतृत्व कर रहे हैं।
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने दवाओं और कृषि अनुसंधान में गति लाने के लिए स्वदेशी जीन संश्लेषण क्षमता निर्माण का रोडमैप तैयार किया है।
- भारत की समृद्ध आनुवंशिक विविधता देश को वैश्विक जीनोमिक और रोग अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र बनाने की क्षमता रखती है।
- गोवा में ‘रिसर्च से कॉमर्शियलाइजेशन’ थीम के साथ 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी सम्मेलन (ETM 2026) का आयोजन किया गया।
- सम्मेलन में पराली और जैविक कचरे से संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन तथा हरित ईंधन प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और सतत औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा भारत सरकार के विभिन्न विभागों ने दो महत्वपूर्ण तकनीकी मोर्चों पर रणनीतिक कदम उठाए हैं। पहला, कार्बन उत्सर्जन में भारी हिस्सेदारी रखने वाले ‘हार्ड-टू-एबेट’ (कठिन उत्सर्जन वाले) उद्योगों के लिए कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) प्रौद्योगिकियों का तीव्र विस्तार; और दूसरा, जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को समाप्त करने हेतु स्वदेशी जीन संश्लेषण (Indigenous Gene Synthesis) क्षमताओं का निर्माण। ये दोनों पहले भारत के वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य और डीप-टेक आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।
1. कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS): औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण की नई दिशा
क्या हुआ?
भारत सरकार ने देश के भारी उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और वर्ष 2070 के ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीसीयूएस (CCUS) प्रौद्योगिकियों के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी है। केंद्रीय बजट के तहत पांच वर्षों की अवधि में ₹20,000 करोड़ के वित्तीय सहयोग के साथ पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—विद्युत (Power), इस्पात (Steel), सीमेंट (Cement), रिफाइनरी (Refineries) और रसायन (Chemicals)—में कार्बन कैप्चर परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा स्थापित दो राष्ट्रीय सीसीयूएस उत्कृष्टता केंद्र (IIT बॉम्बे और JNCASR बेंगलुरु) उन्नत अनुसंधान और पायलट परियोजनाओं को गति दे रहे हैं।
पृष्ठभूमि व तकनीकी कार्यप्रणाली
सीसीयूएस एक ऐसी उन्नत इंजीनियरिंग प्रक्रिया है जिसमें औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बिजली संयंत्रों के फ्लू-गैस (उत्सर्जित धुएं) से कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) को वायुमंडल में मिलने से पहले अलग (कैप्चर) किया जाता है। इसके बाद कैप्चर की गई गैस को संपीडित कर सुरक्षित भूगर्भीय संरचनाओं (जैसे घटे हुए तेल भंडार या गहरी लवणीय जलभृत संरचनाओं) में स्थायी रूप से संग्रहित किया जाता है, अथवा रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा इसे सिंथेटिक ईंधन, यूरिया, पॉलिमर या निर्माण सामग्री (कंक्रीट) में परिवर्तित (यूटिलाइजेशन) किया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- नोडल थिंक-टैंक व फ्रेमवर्क: नीति आयोग ने ‘CCUS पॉलिसी फ्रेमवर्क एंड मैकेनिज्म’ तैयार किया है, जिसमें कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) से भारतीय निर्यात को सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई है।
- अनुसंधान रोडमैप: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का ‘CCUS R&D रोडमैप’ प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर (TRL) 4 और उससे अधिक की तकनीकों के व्यावसायीकरण पर केंद्रित है।
- उत्कृष्टता केंद्र: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु।
2. स्वदेशी जीन संश्लेषण (Gene Synthesis) और सिंथेटिक बायोलॉजी पहल
क्या हुआ?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारत की विशाल आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) का लाभ उठाने और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्वावलंबन के लिए घरेलू जीन संश्लेषण (Gene Synthesis) अवसंरचना को सशक्त करने का आह्वान किया है। वर्तमान में भारतीय शोधकर्ताओं को विशेषीकृत आनुवंशिक अनुक्रमों (Oligonucleotides और सिंथेटिक डीएनए) के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इस निर्भरता को समाप्त करने और अनुसंधान में समय की बचत हेतु ‘सिंथेटिक बायोलॉजी’ पर केंद्रित नए राष्ट्रीय मिशनों को बढ़ावा दिया जा रहा है—ताकि दवाओं, टीकों और रोग प्रतिरोधी फसलों के अनुसंधान में गति आए—।
पृष्ठभूमि
सिंथेटिक बायोलॉजी (कृत्रिम जीवविज्ञान) जीव विज्ञान और इंजीनियरिंग का एक संकर क्षेत्र है, जिसमें डीएनए और जैविक प्रणालियों को नए उपयोगी कार्यों के लिए डिजाइन व संश्लेषित किया जाता है। भारत के पास 4,500 से अधिक विभिन्न जातीय और भौगोलिक समूहों का अद्वितीय ‘फिनोटाइपिक और जेनेटिक डेटा’ है। जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) के तहत 10,000 जीनोम अनुक्रमण पूर्ण होने के बाद, अब आवश्यकता इस बात की है कि बीमारियों के सटीक निदान (Precision Medicine) और अनुकूलित उपचार के लिए भारत अपने स्वयं के जीन-सिंथेसाइज़र प्लेटफॉर्म विकसित करे।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT): यह केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विकास हेतु मुख्य संस्था है।
- जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट: भारत की जनसंख्या-विशिष्ट आनुवंशिक बीमारियों और औषधि प्रतिक्रियाओं की मैपिंग के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय परियोजना।
- सुरक्षा और जैव-नैतिकता (Bio-safety): सिंथेटिक बायोलॉजी और जीन एडिटिंग (CRISPR/Cas9) में सुरक्षा दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य बनाया गया है।
3. 29वां ऊर्जा प्रौद्योगिकी सम्मेलन (ETM 2026): स्वच्छ ईंधन नवाचार
क्या हुआ?
गोवा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाले सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) द्वारा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के सहयोग से 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट (ETM 2026) का आयोजन किया गया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय (Theme) ‘एक्सेलरेटिंग एनर्जी इनोवेशन: फ्रॉम रिसर्च टू कॉमर्शियलाइजेशन’ (अनुसंधान से व्यावसायीकरण तक ऊर्जा नवाचार को गति) रखा गया। इसमें संपीड़ित बायोगैस (CBG), हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और उन्नत रिफाइनरी तकनीकों के व्यावसायीकरण पर विशेष जोर दिया गया।
| पहल / तकनीक | संबंधित विभाग / संस्था | प्राथमिक उद्देश्य |
|---|---|---|
| कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन & स्टोरेज (CCUS) | DST, नीति आयोग, वित्त मंत्रालय | हार्ड-टू-एबेट उद्योगों से कार्बन डाइऑक्साइड का पृथक्करण और स्थायी भंडारण। |
| स्वदेशी जीन संश्लेषण | जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) | चिकित्सा और कृषि शोध में विदेशी डीएनए/जीन आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाना। |
| ऊर्जा प्रौद्योगिकी नवाचार (ETM) | सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT), HPCL | कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और हरित ईंधन अनुसंधान का औद्योगिक व्यावसायीकरण। |
‘भविष्य की प्रौद्योगिकियों में केवल उपभोक्ता बने रहने के बजाय भारत को निर्माता और वैश्विक समाधानकर्ता बनना होगा। उन्नत स्वच्छ ऊर्जा और गहन जैव प्रौद्योगिकी हमारी दीर्घकालिक संप्रभुता के आधार हैं।’
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| CCUS बजटीय आवंटन | ₹20,000 करोड़ (5 वर्ष) |
|---|---|
| राष्ट्रीय CCUS केंद्र | IIT बॉम्बे और JNCASR बेंगलुरु |
| भारत का नेट-जीरो लक्ष्य | वर्ष 2070 |
| 29वां ETM 2026 आयोजन स्थल | गोवा |
| ETM 2026 आयोजक संस्था | सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) |
| जीन संश्लेषण नोडल विभाग | जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) |
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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Q1 कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) के संदर्भ में, भारत में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र किन संस्थानों में स्थापित किए गए हैं?
Q2 CCUS तकनीक मुख्य रूप से किस प्रकार के औद्योगिक क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है?
Q3 हाल ही में जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिए 'स्वदेशी जीन संश्लेषण' (Indigenous Gene Synthesis) क्षमताओं पर बल क्यों दिया जा रहा है?
Q4 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी सम्मेलन (Energy Technology Meet - ETM 2026) का आयोजन किस स्थान पर किया गया?
Q5 ग्लासगो जलवायु शिखर सम्मेलन (COP26) में भारत द्वारा घोषित पंचामृत के तहत 'नेट-जीरो' उत्सर्जन हासिल करने का लक्षित वर्ष क्या है?







