विज्ञान एवं तकनीक

इसरो के SpaDeX मिशन का सफल समापन और DRDO की नई बख्तरबंद तकनीक

इसरो के स्पैडेक्स (SpaDeX) उपग्रहों का सुरक्षित पुन:प्रवेश, DRDO की STANAG-6 लाइटवेट आर्मर तकनीक और वाराणसी में एआई-स्वास्थ्य सम्मेलन परीक्षा के प्रमुख बिंदु बने।

⭐ मुख्य बिंदु

  • इसरो के SpaDeX मिशन के दोनों उपग्रह SDX01 और SDX02 लगभग 21 महीने अंतरिक्ष में बिताने के बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रविष्ट होकर नष्ट हुए।
  • SpaDeX उपग्रहों ने अंतरिक्ष में स्वायत्त डॉकिंग, अनडॉकिंग और विद्युत ऊर्जा हस्तांतरण जैसी जटिल तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया था।
  • भारत अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोड़ने (Docking) की क्षमता सिद्ध करने वाला विश्व का केवल चौथा देश है।
  • SpaDeX की सफलता आगामी चंद्रयान-4 और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के निर्माण का प्रमुख तकनीकी आधार है।
  • DRDO की पुणे स्थित R&DE(E) प्रयोगशाला ने 30mm आर्मर-पियर्सिंग रोधी STANAG-6 लाइटवेट आर्मर पैनल तकनीक विकसित की।
  • यह रक्षा तकनीक 'मेक इन इंडिया' के तहत फ्यूचर इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (FICV) और हल्के टैंकों के लिए घरेलू उद्योगों को सौंपी जा रही है।
  • STPI और IIT BHU ने वाराणसी में स्वास्थ्य और दिव्यांगजनों की सहायक तकनीकों में AI के अनुप्रयोगों पर राष्ट्रीय टेक कॉन्क्लेव आयोजित किया।

भारत के अंतरिक्ष, रक्षा और डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में हाल ही में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के ऐतिहासिक स्पेस डॉकिंग प्रयोग (SpaDeX) के उपग्रहों ने अपनी 21 महीने की कक्षा यात्रा पूरी कर सुरक्षित पुन:प्रवेश किया। वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भविष्य के बख्तरबंद वाहनों के लिए अपनी अत्याधुनिक आर्मर तकनीक भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने की घोषणा की है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन STPI ने स्वास्थ्य और सहायक तकनीकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनुप्रयोगों पर वाराणसी में उच्च स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया।

1. इसरो का SpaDeX मिशन: 21 महीने बाद उपग्रहों का सफल वायुमंडलीय पुन:प्रवेश

क्या हुआ?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस डॉकिंग प्रयोग (Space Docking Experiment - SpaDeX) के दोनों उपग्रहों—SDX01 और SDX02—ने लगभग 21 महीने के सफल मिशन के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में नियंत्रित व सुरक्षित रूप से पुनः प्रवेश (Re-entry) किया और नष्ट हो गए। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, उपग्रह SDX01 दक्षिणी हिंद महासागर के ऊपर और SDX02 उत्तरी प्रशांत महासागर के ऊपर वायुमंडल में समाहित हुआ।

पृष्ठभूमि व तकनीकी क्षमताएँ

इसरो ने SpaDeX मिशन को 30 दिसंबर 2024 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से PSLV रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया था। इस मिशन में लगभग 220-220 किलोग्राम वजनी दो उपग्रह शामिल थे। भारत ने 16 जनवरी 2025 को पहली बार दो उपग्रहों को अंतरिक्ष में जोड़ने (Docking) का सफल परीक्षण किया था। इसके पश्चात अप्रैल 2025 में 15 मीटर की दूरी से पूर्णतः स्वायत्त डॉकिंग (Autonomous Docking) और दोनों उपग्रहों के बीच विद्युत ऊर्जा हस्तांतरण (Power Transfer) का ऐतिहासिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

परीक्षा की दृष्टि से महत्व

  • चौथा राष्ट्र: अंतरिक्ष में डॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाला भारत विश्व का चौथा देश (अमेरिका, रूस और चीन के बाद) बना था।
  • भावी अभियानों की नींव: यह तकनीक भारत के आगामी चंद्रयान-4 (लूनर सैंपल रिटर्न मिशन) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के मॉड्यूल्स को अंतरिक्ष में जोड़ने के लिए अनिवार्य रीढ़ है।
  • अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन (Space Debris Mitigation): मिशन की समाप्ति पर उपग्रहों का स्वाभाविक रूप से कक्षा से नीचे आकर वायुमंडल में भस्म होना वैश्विक अंतरिक्ष धारणीयता (Space Sustainability) मानकों का उत्कृष्ट उदाहरण है।

2. DRDO की STANAG-6 लाइटवेट आर्मर तकनीक: घरेलू उद्योग को हस्तांतरण

क्या हुआ?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की पुणे स्थित प्रयोगशाला रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) - R&DE(E) ने स्वदेशी रूप से विकसित 30mm आर्मर-पियर्सिंग (AP) रोधी 'STANAG-6' लाइटवेट आर्मर पैनल तकनीक को भारतीय उद्योग को हस्तांतरित (Transfer of Technology - ToT) करने हेतु रुचि पत्र (EoI) जारी किया है।

तकनीकी विशेषताएं एवं आवश्यकता

नाटो (NATO) के STANAG 4569 मानकों के तहत लेवल 6 संरक्षण मध्यम-कैलिबर के 30mm भेदी गोला-बारूद के खिलाफ बख्तरबंद वाहनों को उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है। पारंपरिक रूप से इस स्तर की सुरक्षा प्रदान करने वाले आर्मर बहुत भारी होते हैं, जिससे युद्धक वाहनों की गतिशीलता और पेलोड क्षमता सीमित हो जाती है। DRDO द्वारा विकसित नए कंपोजिट आर्मर पैनल्स हल्का होने के बावजूद अभेद्य सुरक्षा प्रदान करते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से महत्व

  • रणनीतिक प्लेटफॉर्म: यह तकनीक भारतीय सेना के 'ज़ोरावर' लाइट टैंक, फ्यूचर इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) और भविष्य के मुख्य युद्धक टैंकों (Next-Gen MBTs) को सुदृढ़ बनाएगी।
  • रक्षा आत्मनिर्भरता: श्रेणी 'A' के तहत भारतीय निजी व सार्वजनिक रक्षा विनिर्माताओं को लाइसेंस मिलने से विदेशी उन्नत बख्तरबंद आयातों पर निर्भरता समाप्त होगी।

3. STPI और IIT BHU का 'AI for Health & Assistive Technologies' कॉन्क्लेव

क्या हुआ?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के स्वायत्त निकाय सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT BHU) के 'सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप' (CIIE) ने वाराणसी में स्वास्थ्य सेवा और सहायक तकनीकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रीय टेक कॉन्क्लेव का आयोजन किया।

प्रमुख घोषणाएँ और विमर्श

सम्मेलन में MeitY सचिव एस. कृष्णन ने रेखांकित किया कि कैसे एआई स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता बढ़ाने, डॉक्टरों के नैदानिक निर्णयों (Clinical Decision Support) को सटीक बनाने और दूरदराज के वंचित क्षेत्रों तक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पहुंचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। साथ ही दिव्यांगजनों की जीवन सुगमता के लिए एआई-आधारित सहायक उपकरणों (Assistive Tech) के स्वदेशी विकास पर बल दिया गया।

परीक्षा की दृष्टि से मुख्य बिंदु

  • इंडियाएआई मिशन (IndiaAI Mission): स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देना केंद्र सरकार के प्रमुख प्राथमिक क्षेत्रों में शामिल है।
  • अकादमिक-उद्योग समन्वय: IIT BHU और STPI का यह संयुक्त प्रयास चिकित्सा विज्ञान, इंजीनियरिंग और स्टार्टअप्स के बीच त्रिकोणीय सहयोग को बढ़ावा देगा।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

मिशन का नामSpaDeX (Space Docking Experiment)
प्रक्षेपण रॉकेटPSLV-C60 (30 दिसंबर 2024)
SpaDeX उपग्रहों के नामSDX01 (चेज़र) एवं SDX02 (टारगेट)
आर्मर तकनीक डेवलपरR&DE(Engineers), DRDO पुणे
STANAG मानक स्तरSTANAG 4569 Level 6 (30mm AP)
AI हेल्थ कॉन्क्लेव आयोजकSTPI एवं CIIE, IIT BHU (वाराणसी)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 हाल ही में पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर अपना 21 महीने का मिशन पूरा करने वाले इसरो के 'SpaDeX' प्रयोग का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q2 अंतरिक्ष में दो अंतरिक्ष यानों को सफलतापूर्वक जोड़ने (Space Docking) में सक्षम होने वाला भारत विश्व का कौन-सा देश बना?

Q3 DRDO की पुणे स्थित प्रयोगशाला R&DE(E) द्वारा विकसित 'STANAG-6' आर्मर तकनीक मुख्य रूप से किस खतरे से सुरक्षा प्रदान करने हेतु बनाई गई है?

Q4 हाल ही में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और IIT BHU द्वारा 'AI for Health & Assistive Technologies' कॉन्क्लेव का आयोजन कहाँ किया गया?

Q5 इसरो का आगामी कौन-सा महत्वाकांक्षी मिशन कक्षा में अंतरिक्ष यान डॉकिंग तकनीक (Docking Technology) पर अनिवार्य रूप से निर्भर है?

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