बिहार विशेष

सोन नदी आधारित ₹2,014 करोड़ की जलापूर्ति परियोजना और हरित ऊर्जा विस्तार को गति

बिहार में सोन नदी से ₹2,014 करोड़ की त्रि-नगरीय जलापूर्ति परियोजना, नवादा में 1,600 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज तथा 2,500 कृषि फीडरों के सौरीकरण को मिली गति।

⭐ मुख्य बिंदु

  • बिहार सरकार ने सासाराम, डेहरी और औरंगाबाद के लिए ₹2,014 करोड़ की सोन नदी आधारित जलापूर्ति योजना को गति दी है।
  • इस पेयजल परियोजना के लिए नाबार्ड के रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (RIDF) से ₹1,774 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
  • यह जलापूर्ति परियोजना वर्ष 2051 तक 12 लाख की संभावित आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई है।
  • नवादा जिले में 1,600 मेगावाट क्षमता की पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो परियोजना और 500 मेगावाट की बैटरी स्टोरेज प्रणाली विकसित हो रही है।
  • राज्यभर में किसानों को निर्बाध बिजली देने के लिए लगभग 2,500 कृषि बिजली फीडरों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है।
  • पीएम-कुसुम योजना के तहत बिहार में 2,900 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हुई है।
  • राज्य में 94 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं और एटीएंडसी घाटा घटकर 11.54% के स्तर पर पहुंच गया है।

बिहार सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, जल संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई बड़े नीतिगत एवं ढांचागत कदमों की घोषणा की है। इनमें सोन नदी आधारित सतही जलापूर्ति परियोजना और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भंडारण परियोजनाओं का क्रियान्वयन प्रमुख हैं। BPSC तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से ये परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

1. सोन नदी आधारित ₹2,014 करोड़ की वृहद सतही जलापूर्ति परियोजना

क्या हुआ?

बिहार सरकार ने शाहाबाद और मगध प्रमंडल के तीन प्रमुख शहरी क्षेत्रों—सासाराम, डेहरी और औरंगाबाद—के लिए ₹2,014 करोड़ की बहुप्रतीक्षित सतही जलापूर्ति परियोजना को आगे बढ़ाया है। इस परियोजना के वित्तीय पोषण के लिए नाबार्ड (NABARD) के ‘ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष’ (RIDF - Rural Infrastructure Development Fund) के अंतर्गत ₹1,774 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।

मुख्य विशेषताएं और तकनीकी पहलू

  • जल स्रोत: यह परियोजना भूमिगत जल दोहन के स्थान पर सोन नदी के सतही जल (Surface Water) के शोधन और पाइपलाइन वितरण पर आधारित है।
  • लाभार्थी आबादी: इस योजना से प्रारंभिक चरण में लगभग 8 लाख शहरी और अर्ध-शहरी आबादी को शुद्ध पेयजल मिलेगा, जबकि इसे वर्ष 2051 तक 12 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को पूरा करने के अनुसार डिज़ाइन किया गया है।
  • पर्यावरणीय संरक्षण: यह पहल बिहार के महत्वाकांक्षी अभियान ‘जल-जीवन-हरियाली’ के लक्ष्यों के पूर्णतः अनुकूल है, जिसका उद्देश्य गिरते भूजल स्तर (Water Table Depletion) को रोकना है।

2. बिहार में हरित ऊर्जा का विस्तार: नवादा पंप्ड स्टोरेज और 2,500 कृषि फीडर

ऊर्जा क्षेत्र में नए कदम

नई दिल्ली में आयोजित ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट’ के दौरान राज्य ऊर्जा विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार बिहार नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण (RE Storage) में पूर्वी भारत का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

प्रमुख घोषणाएं एवं परियोजनाएं

  • नवादा पंप्ड स्टोरेज परियोजना: नवादा जिले की उपयुक्त भौगोलिक बनावट का लाभ उठाते हुए वहां 1,600 मेगावाट क्षमता की पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजना विकसित की जा रही है। इसके साथ ही ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए 500 मेगावाट की बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रणाली (BESS) भी जोड़ी जा रही है।
  • कृषि फीडरों का सौरीकरण: किसानों को दिन के समय सिंचाई के लिए निरंतर बिजली उपलब्ध कराने और डीजल निर्भरता घटाने के लिए राज्य भर में लगभग 2,500 समर्पित कृषि बिजली फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा रहा है।
  • पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) का विस्तार: केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान’ (PM-KUSUM) योजना के तहत बिहार में 2,900 मेगावाट कुल क्षमता के विभिन्न घटकों को मंजूरी दी जा चुकी है।
  • कजरा सोलर हब: लखीसराय जिले के कजरा में सौर ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण के संयुक्त संयंत्र की स्थापना का कार्य तीव्र गति से चल रहा है।
  • स्मार्ट मीटरिंग और तकनीकी सुधार: राज्य में अब तक 94 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप वितरण हानियां (AT&C Loss) लगभग 60% से घटकर 11.54% पर आ गई हैं।

3. सुशासन और प्रशासनिक सुधार

राज्य सरकार ने विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग और विभागों के मध्य बेहतर समन्वय के लिए शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण पुनर्गठन किया है। कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) और शिक्षा विभाग जैसे प्रमुख विभागों में नए दायित्व सौंपे गए हैं। साथ ही, कैबिनेट की निर्णय प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘ई-कैबिनेट प्रणाली’ के संचालन को गति प्रदान की गई है।

परीक्षा उपयोगी सारणी: महत्वपूर्ण तथ्य

परियोजना / पहलसंबद्ध जिला / क्षेत्रमुख्य बिंदु / क्षमता
सतही जलापूर्ति परियोजनासासाराम, डेहरी, औरंगाबादलागत ₹2,014 करोड़ (नाबार्ड RIDF सहायता: ₹1,774 करोड़)
पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्टनवादा1,600 MW क्षमता (ऑफ़-स्ट्रीम क्लोज्ड लूप प्रणाली)
कृषि फीडर सौरीकरणसमग्र बिहार2,500 कृषि बिजली फीडरों का पृथक्करण व सोलराइजेशन
सोलर एवं बैटरी स्टोरेज हबकजरा (लखीसराय)सौर ऊर्जा उत्पादन व BESS बैकअप

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

जलापूर्ति परियोजना लागत₹2,014 करोड़
नाबार्ड वित्तीय सहायता (RIDF)₹1,774 करोड़
नवादा पंप्ड स्टोरेज क्षमता1,600 MW
सौरीकृत होने वाले कृषि फीडरलगभग 2,500
पीएम-कुसुम स्वीकृत कुल क्षमता2,900 MW
स्थापित स्मार्ट प्रीपेड मीटर94 लाख से अधिक
वर्तमान AT&C हानि स्तर11.54%

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 बिहार सरकार द्वारा हाल ही में ₹2,014 करोड़ की सतही जलापूर्ति परियोजना किस नदी के जल पर आधारित की गई है?

Q2 सासाराम, डेहरी और औरंगाबाद जलापूर्ति परियोजना के लिए नाबार्ड ने किस फंड के तहत ₹1,774 करोड़ की सहायता दी है?

Q3 बिहार के किस जिले में 1,600 मेगावाट क्षमता की पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजना विकसित की जा रही है?

Q4 किसानों को सिंचाई हेतु सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए बिहार में लगभग कितने कृषि फीडरों का सौरीकरण किया जा रहा है?

Q5 बिहार के किस स्थान पर बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किया जा रहा है?

स्रोत