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भारत के 28 राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री 2026: पूरी सूची व संवैधानिक तथ्य

19 अक्टूबर 2026 तक भारत के 28 राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल एक जगह पढ़ें। राज्यपाल की नियुक्ति, मुख्यमंत्री की भूमिका, हालिया बदलाव और परीक्षा-उपयोगी तथ्य भी जानें।

⭐ मुख्य बिंदु

  • भारत में 28 राज्य हैं; यह सूची केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल नहीं करती।
  • मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक कार्यकारी नेतृत्व करता है।
  • राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं और उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
  • अनुच्छेद 153 राज्यपाल, 155 नियुक्ति और 156 पदावधि से जुड़ा है।
  • मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी हैं।
  • राज्यपाल की सामान्य पदावधि पांच वर्ष है, पर वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं।
  • नई राज्यपाल नियुक्ति की घोषणा और पदभार ग्रहण की तारीख अलग हो सकती है।

परिचय

भारत के राज्यों में शासन की व्यवस्था संसदीय प्रणाली पर आधारित है। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्य सरकार का निर्वाचित तथा वास्तविक कार्यकारी नेतृत्व करते हैं, जबकि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर दोनों पदों की भूमिका, नियुक्ति, कार्यकाल और वर्तमान पदाधिकारियों की जोड़ी पूछी जाती है। इसलिए नाम याद करने के साथ यह समझना भी जरूरी है कि दोनों पद एक जैसे नहीं हैं।

नीचे दी गई सूची में भारत के 28 राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल दिए गए हैं। यह सूची 19 अक्टूबर 2026 के लिए तैयार की गई है। हाल में घोषित कुछ राज्यपाल नियुक्तियों पर राष्ट्रपति भवन ने साफ कहा है कि वे संबंधित व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होंगी। जहां उपलब्ध जानकारी में शपथ या पदभार की तारीख स्पष्ट नहीं है, वहां उस व्यक्ति को नियुक्ति के रूप में चिह्नित किया गया है—उसे निर्विवाद रूप से पदभार संभाल चुका राज्यपाल न समझें। यह सावधानी खासकर केरल, ओडिशा, सिक्किम और उत्तराखंड के हालिया बदलावों के लिए उपयोगी है। राष्ट्रपति भवन की नियुक्ति-विज्ञप्ति और राज्यवार सूची के स्रोत अंत में दिए गए हैं।

2026 में राज्यों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल: पूरी सूची

तालिका में राज्यों को वर्णक्रम के बजाय प्रचलित राज्यवार क्रम में रखा गया है। नामों की वर्तनी स्रोतों में हिंदी और अंग्रेजी में थोड़ी अलग मिल सकती है; परीक्षा में व्यक्ति की पहचान और राज्य का सही मिलान प्रमुख है।

क्रमराज्यमुख्यमंत्रीराज्यपाल / नियुक्ति की स्थिति
1आंध्र प्रदेशएन. चंद्रबाबू नायडूएस. अब्दुल नजीर
2अरुणाचल प्रदेशपेमा खांडूकैवल्य त्रिविक्रम परनाइक
3असमहिमंत बिस्वा सरमालक्ष्मण प्रसाद आचार्य
4बिहारसम्राट चौधरीसैयद अता हसनैन
5छत्तीसगढ़विष्णु देव सायरमेन डेका
6गोवाप्रमोद सावंतपुसापति अशोक गजपति राजू
7गुजरातभूपेंद्र पटेलआचार्य देवव्रत
8हरियाणानायब सिंह सैनीअसीम कुमार घोष
9हिमाचल प्रदेशसुखविंदर सिंह सुक्खूकविंदर गुप्ता
10झारखंडहेमंत सोरेनसंतोष कुमार गंगवार
11कर्नाटकडी. के. शिवकुमारडॉ. सुधा यादव
12केरलवी. डी. सतीशनओम प्रकाश माथुर (नियुक्ति; पदभार की तारीख अलग से जांचें)
13मध्य प्रदेशमोहन यादवमंगूभाई छगनभाई पटेल
14महाराष्ट्रदेवेंद्र फडणवीसजिष्णु देव वर्मा
15मणिपुरयुमनाम खेमचंद सिंहअजय कुमार भल्ला
16मेघालयकॉनराड संगमासी. एच. विजयशंकर
17मिजोरमलालदुहोमाविजय कुमार सिंह
18नागालैंडनेफियू रियोनंद किशोर यादव
19ओडिशामोहन चरण माझीबृज मोहन राम (नियुक्ति; पदभार की तारीख अलग से जांचें)
20पंजाबभगवंत मानगुलाब चंद कटारिया
21राजस्थानभजन लाल शर्माहरिभाऊ किसनराव बागड़े
22सिक्किमप्रेम सिंह तमांगदुष्यंत गौतम (नियुक्ति; पदभार की तारीख अलग से जांचें)
23तमिलनाडुसी. जोसेफ विजयराजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर
24तेलंगानाए. रेवंत रेड्डीशिव प्रताप शुक्ल
25त्रिपुरामाणिक साहाइंद्रसेना रेड्डी नल्लू
26उत्तर प्रदेशयोगी आदित्यनाथआनंदीबेन पटेल
27उत्तराखंडपुष्कर सिंह धामीढाल सिंह बिसेन (नियुक्ति; पदभार की तारीख अलग से जांचें)
28पश्चिम बंगालसुवेंदु अधिकारीआर. एन. रवि

स्थिति-सूचना: 12 अक्टूबर 2026 की राष्ट्रपति भवन विज्ञप्ति में केरलम, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम के लिए नियुक्तियां घोषित की गईं। विज्ञप्ति के अनुसार नियुक्तियां कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी हैं। ऊपर जिन नामों पर नियुक्ति का संकेत दिया गया है, उनकी शपथ/कार्यभार स्थिति को आधिकारिक सूचना से अलग से मिलाना चाहिए। राज्य के नाम के लिए सामान्य प्रचलित हिंदी रूप “केरल” रखा गया है; नियुक्ति-विज्ञप्ति में “केरलम” लिखा है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री: अंतर समझें

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। राज्य की कार्यपालिका शक्ति संविधान के अनुसार राज्यपाल में निहित होती है, लेकिन सामान्य संसदीय शासन में उसका प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर होता है। कुछ संवैधानिक परिस्थितियों में राज्यपाल को अपने विवेक से निर्णय लेने की भूमिका भी मिल सकती है। राज्यपाल का पद केंद्र और राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के बीच एक कड़ी के रूप में भी महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक राजनीतिक और कार्यकारी नेतृत्व करता है। आम तौर पर विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन का नेता मुख्यमंत्री बनता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं; अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर होती है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। इसीलिए किसी सरकार का बहुमत विधानसभा में जांचा जाता है, राज्यपाल के निजी समर्थन से नहीं।

अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 155 नियुक्ति, अनुच्छेद 156 पदावधि, अनुच्छेद 163 मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह, और अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों की नियुक्ति व विधानसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व से जुड़े हैं। अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के उन कर्तव्यों का उल्लेख करता है जिनके अंतर्गत वह राज्यपाल को मंत्रिपरिषद के निर्णयों और राज्य प्रशासन से संबंधित जानकारी देता है।

कार्यकाल, योग्यता और पद की प्रकृति

राज्यपाल सामान्यतः पांच वर्ष के लिए पद पर रहता है, लेकिन वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है; इसलिए पांच वर्ष को हर परिस्थिति में सुनिश्चित, अपरिवर्तनीय कार्यकाल न समझें। उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक राज्यपाल पद पर बना रह सकता है। एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल बनने के लिए भारत का नागरिक होना और कम-से-कम 35 वर्ष की आयु पूरी करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री के लिए अलग से संविधान में कोई निश्चित पांच-वर्षीय व्यक्तिगत पदावधि नहीं लिखी गई है। सामान्यतः मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद विधानसभा के विश्वास पर पद पर बने रहते हैं। विधानसभा का कार्यकाल, पहले भंग न होने पर, सामान्यतः पांच वर्ष होता है; पर मुख्यमंत्री का पद बहुमत खोने, इस्तीफे या अन्य संवैधानिक परिस्थिति में पहले समाप्त हो सकता है। इसलिए “मुख्यमंत्री का कार्यकाल हमेशा पांच वर्ष” कहना परीक्षा में गलत हो सकता है।

केंद्रशासित प्रदेशों से भ्रम न करें

यह लेख केवल 28 पूर्ण राज्यों की सूची है। भारत में राज्यों के अलावा 8 केंद्रशासित प्रदेश भी हैं। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में मुख्यमंत्री तथा निर्वाचित विधानमंडल हैं, पर वहां संवैधानिक ढांचा पूर्ण राज्य जैसा नहीं है। अन्य केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपाल के बजाय उपराज्यपाल या प्रशासक होते हैं। इसीलिए “भारत में कितने राज्यपाल?” जैसे प्रश्न में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पदों को मिलाने से बचें।

हालिया बदलाव

2026 में कुछ राज्यों के नेतृत्व और राज्यपाल पदों में बदलाव हुए हैं। राज्यवार उपलब्ध अद्यतन सूची में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी और कर्नाटक में डी. के. शिवकुमार दर्ज हैं; पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु तथा केरल में भी मुख्यमंत्री के नाम पहले की सूचियों से अलग हैं। इन नामों को पुरानी पुस्तकों या पुराने स्थिर नोट्स से मिलाकर न पढ़ें—पदाधिकारी समय के साथ बदलते हैं।

राज्यपालों के लिए राष्ट्रपति भवन ने 12 अक्टूबर 2026 को नई नियुक्तियों की घोषणा की: ओम प्रकाश माथुर को केरलम, राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु, बृज मोहन राम को ओडिशा, सुधा यादव को कर्नाटक, ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम को सिक्किम। उसी विज्ञप्ति में स्पष्ट है कि नियुक्तियां पदभार ग्रहण करने पर प्रभावी होंगी। अतः परीक्षा की तारीख के बहुत निकट किसी बदलाव की स्थिति में नियुक्ति की घोषणा और वास्तविक कार्यभार ग्रहण—दोनों को अलग-अलग समझना चाहिए।

याद रखने की ट्रिक

पहले उन राज्यों के जोड़े याद करें जिनके नाम अक्सर उलझते हैं: कर्नाटक—सुधा यादव, तमिलनाडु—अर्लेकर, सिक्किम—दुष्यंत गौतम नियुक्तियों के प्रमुख नए समूह में हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के नामों के लिए क्षेत्रवार पुनरावृत्ति करें: उत्तर भारत, पूर्वोत्तर, दक्षिण भारत और पश्चिम-मध्य भारत। हर बार राज्य का नाम बोलकर पहले मुख्यमंत्री और फिर राज्यपाल कहें। इससे दो समानांतर सूचियों के नाम आपस में नहीं मिलते।

एक छोटा सूत्र याद रखें: मुख्यमंत्री = बहुमत और मंत्रिपरिषद; राज्यपाल = नियुक्त संवैधानिक प्रमुख। “जनता सीधे राज्यपाल चुनती है” गलत है; “राज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होते हैं” सही है। नियुक्ति की खबर देखकर तुरंत नाम बदलने के बजाय यह भी जांचें कि व्यक्ति ने पदभार ग्रहण किया या नहीं।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

पिछले वर्षों के प्रतियोगी परीक्षा-पैटर्न में प्रश्न प्रायः चार रूपों में आते हैं: राज्य और मुख्यमंत्री का मिलान; राज्य और राज्यपाल का मिलान; नियुक्ति या कार्यकाल का संवैधानिक अनुच्छेद; और राज्य बनाम केंद्रशासित प्रदेश का अंतर। कभी-कभी एक गलत विकल्प किसी पुराने मुख्यमंत्री या पूर्व राज्यपाल का होता है। इसलिए रटने के साथ सूची की तारीख लिखना उपयोगी है—जैसे “19 अक्टूबर 2026 तक”।

एक और आम जाल यह है कि नियुक्ति की घोषणा को पदभार ग्रहण समझ लिया जाता है। संविधान और राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में पदभार की प्रभावी तारीख महत्वपूर्ण है। प्रश्न अगर “नियुक्त” पूछे तो घोषणा देखिए; यदि “वर्तमान राज्यपाल” पूछे तो पदभार की पुष्टि कीजिए। इसी प्रकार पांच वर्ष राज्यपाल की सामान्य पदावधि है, जबकि पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत है। मुख्यमंत्री विधानसभा के प्रति उत्तरदायी मंत्रिपरिषद का प्रमुख है।

स्रोत और पुनरीक्षण

राज्यपाल नियुक्तियों की प्राथमिक पुष्टि राष्ट्रपति भवन की 12 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति से की जानी चाहिए। भारत सरकार के राष्ट्रीय पोर्टल पर राज्यवार पदाधिकारियों की निर्देशिका उपलब्ध है, जबकि संकलित राज्यवार सूची हालिया नामों के मिलान में सहायक है। पदाधिकारी बदल सकते हैं; इसलिए इस लेख को परीक्षा के दिन के निकट आधिकारिक सूचना से दोबारा मिलाना उचित है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भारत के राज्य28
राज्यपाल नियुक्तिराष्ट्रपति द्वारा
राज्यपाल से संबंधित अनुच्छेद153 से 156
राज्यपाल की न्यूनतम आयु35 वर्ष
मुख्यमंत्री नियुक्तिराज्यपाल द्वारा
मंत्रिपरिषद का उत्तरदायित्वविधानसभा के प्रति सामूहिक
सूची की संदर्भ तारीख19 अक्टूबर 2026

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?

Q2 राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित अनुच्छेद कौन-सा है?

Q3 राज्य मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?

Q4 राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?

Q5 राज्यपाल की सामान्य पदावधि किस अवधि की होती है?

स्रोत