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सिंधु घाटी सभ्यता: प्रमुख पुरातात्विक स्थल, उनके खोजकर्ता और प्रामाणिक साक्ष्य

सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगरों, उत्खननकर्ताओं, भौगोलिक विस्तार और पुरातात्विक साक्ष्यों का संपूर्ण संदर्भ। UPSC, BPSC और SSC के लिए विशेष गाइड।

⭐ मुख्य बिंदु

  • सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्य युगीन सभ्यता थी, जिसका सर्वमान्य कालक्रम 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक है।
  • सर्वप्रथम 1921 में दयाराम साहनी ने रावी नदी के तट पर हड़प्पा स्थल की खोज की थी।
  • लोथल एकमात्र ऐसा प्रमुख हड़प्पा स्थल है जहाँ कृत्रिम ईंटों से निर्मित गोदीवाड़ा (डॉकयार्ड) मिला है।
  • धोलावीरा अपनी उन्नत त्रिस्तरीय नगर योजना और पाषाण निर्मित जल संचयन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है।
  • कालीबंगा से प्राक्-हड़प्पा काल के जुते हुए खेत और अग्नि कुण्डों के स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं।
  • चन्हुदड़ो एकमात्र ऐसा हड़प्पा कालीन नगर है जहाँ किसी भी प्रकार के दुर्ग (Citadel) के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
  • राखीगढ़ी (हरियाणा) वर्तमान भारत की सीमा के भीतर स्थित सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे विशाल स्थल है।
  • हड़प्पावासी लोहे (Iron) की धातु से पूर्णतः अपरिचित थे और उनकी लिपि भावचित्रात्मक व अभी तक अपठित है।

सिंधु घाटी सभ्यता: कालखंड, नामकरण और भौगोलिक विस्तार

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) विश्व की प्राचीनतम कांस्य युगीन नगरीय सभ्यताओं में से एक है। रेडियोकार्बन (C-14) तिथिक्रम के अनुसार इसका परिपक्व चरण लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इस सभ्यता का सर्वप्रथम खोजा गया स्थल हड़प्पा था, जिसके कारण इसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ भी कहा जाता है। बाद में सिंधु तथा उसकी सहायक नदियों (घग्घर-हाकरा आदि) के तटवर्ती क्षेत्रों में सैकड़ों स्थलों के मिलने से इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता का नाम भी दिया गया।

इस सभ्यता का कुल विस्तार त्रिभुजाकार स्वरूप में लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था, जिसकी सीमाएं निम्नलिखित रूप से निर्धारित थीं:

  • उत्तरी सीमा: मांडा (जम्मू-कश्मीर, चिनाब नदी के तट पर)
  • दक्षिणी सीमा: दायमाबाद (महाराष्ट्र, प्रवरा/गोदावरी नदी के तट पर)
  • पश्चिमी सीमा: सुत्कागेनडोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान, दाश्त नदी के तट पर)
  • पूर्वी सीमा: आलमगीरपुर (मेरठ, उत्तर प्रदेश, हिंडन नदी के तट पर)

प्रमुख स्थल, खोजकर्ता, नदी और महत्वपूर्ण खोजें

प्रतियोगी परीक्षाओं में स्थलों की अवस्थिति, संबंधित नदियाँ, खोजकर्ता और वहाँ से मिले विशिष्ट पुरावशेषों का मिलान बार-बार पूछा जाता है। नीचे दी गई तालिका में मुख्य और सर्वाधिक पूछे जाने वाले स्थलों का संकलन है:

स्थल (Site)वर्तमान अवस्थितिनदीउत्खननकर्ता एवं वर्षप्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य
हड़प्पासाहीवाल जिला, पंजाब (पाकिस्तान)रावी (बायाँ तट)दयाराम साहनी (1921)R-37 कब्रिस्तान, अन्न भंडार (Granaries), प्रसाधन मंजूषा, पाषाण की नर्तक मूर्ति, श्रमिकों के आवास
मोहनजोदड़ोलरकाना जिला, सिंध (पाकिस्तान)सिंधु (दायाँ तट)राखालदास बनर्जी (1922)विशाल स्नानागार (Great Bath), विशाल अन्नागार, कांस्य की नर्तकी की मूर्ति, पशुपति मुहर, दाढ़ी वाले पुजारी की प्रतिमा
लोथलअहमदाबाद, गुजरात (भारत)भोगवाएस. आर. राव (1954-57)गोदीवाड़ा (Dockyard), फारस की खाड़ी की मुहर, चावल की भूसी, अग्नि वेदिकाएँ, शतरंज के मोहरे, हाथीदांत का पैमाना
कालीबंगाहनुमानगढ़, राजस्थान (भारत)घग्घर (प्राचीन सरस्वती)अमलानन्द घोष (1953), बी. बी. लाल व बी. के. थापर (1961)जुते हुए खेत के साक्ष्य (द्विफसली कृषि), काली मिट्टी की चूड़ियाँ, अग्नि कुण्ड, अलंकृत ईंटें, भूकंप के प्राचीनतम साक्ष्य
धोलावीराकच्छ, गुजरात (भारत)मनहर एवं मनसरजे. पी. जोशी (1967-68), आर. एस. बिष्ट (1990)त्रिस्तरीय नगर विभाजन (दुर्ग, मध्यम नगर, निचला नगर), उन्नत जल संचयन प्रणाली (Reservoirs), 10 अक्षरों वाला विशाल सूचना-पट्ट (Signboard)
राखीगढ़ीहिसार, हरियाणा (भारत)घग्घर-दृषद्वतीसूरजभान (1969), अमरेंद्र नाथ (1997-2000)भारत में स्थित सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल, अन्नागार, रक्षा प्राचीर, शवाधान टीला (Mound-7), प्राचीन डीएनए साक्ष्य
चन्हुदड़ोसिंध (पाकिस्तान)सिंधुएन. जी. मजूमदार (1931), ई. जे. एच. मैके (1935)एकमात्र स्थल जहाँ दुर्ग (Citadel) नहीं मिला; मनका बनाने का कारखाना (Bead factory), लिपिस्टिक और सौंदर्य प्रसाधन, बिल्ली का पीछा करते कुत्ते के पदचिह्न
बनावलीफतेहाबाद, हरियाणा (भारत)घग्घर (प्राचीन सरस्वती)आर. एस. बिष्ट (1973-74)मिट्टी का बना हल (Terracotta plough), उत्तम किस्म की जौ (Barley), जल निकासी व्यवस्था का अभाव
सुरकोटदाकच्छ, गुजरात (भारत)—जे. पी. जोशी (1964)घोड़े की अस्थियों के संभावित अवशेष, तराजू का पलड़ा, पत्थर की चिनाई वाला परकोटा
रोपड़ (रूपनगर)पंजाब (भारत)सतलुजयज्ञदत्त शर्मा (1953-56)स्वतंत्र भारत में उत्खनित पहला प्रमुख स्थल; मनुष्य के साथ पालतू कुत्ते को दफनाने का साक्ष्य

प्रमुख नगरों की वास्तुकला एवं आंतरिक विशेषताएं

हड़प्पा सभ्यता को उसकी समकालीन मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यताओं से अलग करने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व उसका उत्कृष्ट नगर नियोजन (Town Planning) था।

1. ग्रिड पद्धति और जल निकासी

अधिकांश नगर दो भागों में विभक्त थे: पश्चिम दिशा में ऊँचाई पर बना दुर्ग (Citadel), जहाँ संभवतः शासक वर्ग या प्रशासनिक गतिविधियाँ केंद्रित थीं; तथा पूर्व दिशा में फैला निचला नगर (Lower Town), जहाँ सामान्य नागरिकों के आवास थे। सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं (ग्रिड पैटर्न या चेसबोर्ड प्रणाली)। घरों के गंदे पानी की निकासी के लिए ढकी हुई नालियों की व्यवस्था थी, जो आगे मुख्य सड़क की बड़ी भूमिगत नालियों में मिलती थीं। निर्माण में 1:2:4 अनुपात की पकी ईंटों (Burnt Bricks) का व्यापक प्रयोग हुआ।

2. मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार

विशाल स्नानागार (Great Bath) मोहनजोदड़ो के दुर्ग क्षेत्र में स्थित है। इसके फर्श को जलरोधी (waterproof) बनाने के लिए ईंटों की चुनाई के साथ जिप्सम और बिटुमेन (डामर) का लेप किया गया था। विद्वानों के अनुसार इसका उपयोग सार्वजनिक अनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था।

3. धोलावीरा का अनूठा जल प्रबंधन

धोलावीरा अन्य हड़प्पा नगरों की तुलना में दो नहीं बल्कि तीन स्तरों में विभाजित था—दुर्ग (Citadel), मध्यम नगर (Middle Town) और निचला नगर (Lower Town)। यहाँ वर्षा जल संचयन के लिए 16 से अधिक विशाल पत्थरों से तराशे गए जलाशयों (Water Reservoirs) की श्रृंखला पाई गई है, जो तत्कालीन इंजीनियरिंग का अद्वितीय उदाहरण है।

याद रखने की परीक्षा ट्रिक्स (Mnemonics)

ट्रिक 1: ‘लोभी मौसी का हरा कंघा रमा ने ले लिया, तो वह रोष में आ गई’
• लोभी: लोथल — भोगवा नदी
• मौसी: मोहनजोदड़ो — सिंधु नदी
• हरा: हड़प्पा — रावी नदी
• कंघा: कालीबंगा — घग्घर नदी
• रमा: रंगपुर — मादर नदी
• रोष: रोपड़ — सतलुज नदी

ट्रिक 2: डॉकयार्ड और बिना दुर्ग वाला शहर
• जहाजी गोदी (Dockyard) = लोथल (व्यापार का ‘लोकल पोर्ट’)
• बिना दुर्ग (No Citadel) = चन्हुदड़ो (शिल्पकारों का औद्योगिक शहर, सुरक्षा प्राचीर रहित)

परीक्षा में कैसे पूछे जाते हैं प्रश्न (PYQs Trend Analysis)

विगत वर्षों के UPSC, State PSC और SSC के प्रश्न-पत्रों का विश्लेषण करने पर तीन प्रमुख प्रवृत्तियाँ स्पष्ट होती हैं:

  • नकारात्मक पहचान वाले प्रश्न: अक्सर पूछा जाता है कि ‘हड़प्पावासी किस धातु/पशु से परिचित नहीं थे?’—परीक्षार्थियों को स्पष्ट याद रखना चाहिए कि हड़प्पा सभ्यता कांस्य युगीन थी; वे लोहे (Iron) से पूरी तरह अनभिज्ञ थे। घोड़े के साक्ष्य संदेहास्पद हैं और गाय प्रमुख पशु नहीं बल्कि कूबड़ वाला सांड़ (Humped Bull) सबसे पूजनीय था।
  • स्थल और विशिष्ट पुरावशेष का मिलान: जुता हुआ खेत (कालीबंगा), गोदीवाड़ा (लोथल), 10 अक्षरों का अभिलेख (धोलावीरा) तथा पकी मिट्टी का हल (बनावली) सर्वाधिक दोहराए जाने वाले प्रश्न हैं।
  • कथन-आधारित प्रश्न: UPSC और BPSC में नगर नियोजन के अपवादों पर प्रश्न बनते हैं; जैसे—धोलावीरा का तीन भागों में विभाजन, बनावली में जल निकासी का अभाव, और चन्हुदड़ो का बिना दुर्ग होना।

हालिया पुरातात्विक उत्खनन एवं समसामयिक अपडेट्स

सिंधु घाटी सभ्यता केवल अतीत का विषय नहीं है, बल्कि निरंतर नए अनुसंधानों के साथ अद्यतन हो रही है:

  • राखीगढ़ी (हरियाणा) उत्खनन: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा राखीगढ़ी के टीला संख्या 7 (Mound-7) से प्राप्त प्राचीन मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण हेतु भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) के कोलकाता स्थित भंडार केंद्र में भेजा गया है। प्राचीन डीएनए अध्ययनों ने स्पष्ट किया है कि यहाँ की आबादी स्थानीय थी और स्टेपी चरवाहों का आगमन इसके पतन के बहुत बाद हुआ।
  • लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC): पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा लोथल में विश्व स्तरीय ‘नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स’ का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 77 मीटर ऊंचा विश्व का सबसे ऊंचा लाइटहाउस संग्रहालय और प्राचीन बंदरगाह शहर की प्रतिकृति तैयार की जा रही है।
  • धोलावीरा को यूनेस्को धरोहर का दर्जा: वर्ष 2021 में कच्छ स्थित धोलावीरा को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) घोषित किया गया, जो भारत का 40वां विश्व धरोहर स्थल बना।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

सर्वप्रथम खोजा गया स्थलहड़प्पा (1921, दयाराम साहनी)
सभ्यता का भौगोलिक आकारत्रिभुजाकार (लगभग 13 लाख वर्ग किमी)
भारत में सबसे बड़ा स्थलराखीगढ़ी (हिसार, हरियाणा)
एकमात्र गोदीवाड़ा (बंदरगाह) स्थललोथल (भोगवा नदी, गुजरात)
त्रिस्तरीय विभाजन वाला नगरधोलावीरा (कच्छ, गुजरात)
दुर्ग-रहित औद्योगिक नगरचन्हुदड़ो (सिंध, पाकिस्तान)
सभ्यता की धातु श्रेणीकांस्य युगीन (तांबा + टिन; लोहा अज्ञात)

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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Q1 हड़प्पा सभ्यता का निम्नलिखित में से कौन-सा स्थल अपने त्रिस्तरीय नगर विभाजन (दुर्ग, मध्यम नगर एवं निचला नगर) के लिए प्रसिद्ध है?

Q2 सिंधु घाटी सभ्यता के किस स्थल से प्राक्-हड़प्पा काल के जुते हुए खेत (Ploughed field) के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं?

Q3 सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

Q4 प्रसिद्ध कांस्य नर्तकी (Bronze Dancing Girl) की प्रतिमा निम्नलिखित में से किस पुरातात्विक स्थल से प्राप्त हुई थी?

Q5 हाल ही में चर्चा में रहा राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) किस हड़प्पा कालीन स्थल के समीप विकसित किया जा रहा है?

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